Raebareli News: विभाग की अनदेखी के बाद किसानों ने खुद संभाली कमान, जनसहयोग से शुरू हुई जगतपुर कट नहर की सफाई
करीब दो महीने तक कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों और किसानों ने आर्थिक सहयोग से मशीन लगवाकर शुरू कराया सफाई अभियान। धान की रोपाई के लिए सिंचाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद।
रायबरेली। सिंचाई विभाग की कथित उदासीनता के बीच जगतपुर कट नहर की सफाई का कार्य अब जनसहयोग से शुरू हो गया है। जिला पंचायत सदस्य राकेश सिंह राना की पहल और ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग से सोमवार को मशीन लगाकर नहर की सफाई कराई गई। इससे बैरीहार, कुंड, टांघन समेत आसपास के गांवों के किसानों को धान की रोपाई के लिए समय पर सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद है।
दो माह तक सफाई नहीं होने से बढ़ी किसानों की परेशानी
स्थानीय किसानों के अनुसार, पिछले करीब दो महीनों से नहर की सफाई कराने की मांग शासन और सिंचाई विभाग से लगातार की जा रही थी, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। नहर में सिल्ट और झाड़ियां जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित हो गया था, जिससे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित हो रही थी।
'रिकॉर्ड में नहर नहीं' बताकर विभाग ने जताई असमर्थता
जिला पंचायत सदस्य राकेश सिंह राना ने बताया कि नहर की सफाई के लिए कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजे गए। उनके अनुसार, विभाग ने यह कहते हुए सफाई कराने में असमर्थता जताई कि यह नहर विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं है।
उन्होंने बताया कि पहले यह नहर शंकरपुर माइनर का हिस्सा थी, लेकिन शारदा सहायक नहर परियोजना लागू होने के बाद इसका स्वरूप बदल गया और अब इसे जगतपुर कट नहर के नाम से जाना जाता है। नियमित देखरेख न होने के कारण इसकी सफाई लंबे समय से नहीं हो पाई थी।
जनसहयोग से जुटाई गई राशि, मशीन लगाकर शुरू हुआ कार्य
राकेश सिंह राना ने बताया कि जब विभागीय स्तर पर समाधान नहीं निकला तो किसानों के हित में जनसहयोग से धन एकत्र किया गया और मशीन लगाकर सफाई अभियान शुरू कराया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सफाई पूरी होने के बाद क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि तक सिंचाई का पानी आसानी से पहुंचेगा और धान की रोपाई में आ रही दिक्कतें काफी हद तक कम होंगी।
इस अवसर पर आकाश त्रिपाठी, रंजीत, सुखलाल, सत्यम त्रिपाठी, मनोज, सोनू अवस्थी, रामलखन सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे। किसानों ने सफाई कार्य शुरू होने पर संतोष जताया और इसे खेती के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।
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