Holi Festival : 4 मार्च को ही पूरे देश में मनाई जाएगी होली, जानिए कब और कितने बजे होगा होलिका दहन
कानपुर, अमृत विचार। इस बार होली पर्व को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस भ्रम को दूर करते हुए ज्योतिषाचार्यों ने रंगोत्सव 4 को मनाए जाने की घोषणा कर दी है। बताया गया कि 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट (3 मार्च की सुबह) के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रहेगा। 3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा है, यह ग्रहण 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक लगेगा। सूतक सुबह 9 बजकर 20 मिनट से लागू होगा। 4 मार्च को ही पूरे देश में रंगोत्सव के रूप में होली मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रीय गणना के अनुसार 2 मार्च को अर्द्धरात्रि के बाद भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन करना उचित और शास्त्रसम्मत रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु परंपरागत विधि-विधान से होलिका पूजन कर सकते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन के लिए पूर्णिमा तिथि, भद्रा मुक्त समय और रात्रि काल का होना जरूरी माना जाता है।
इस बार भद्रा पूरी रात रहने के कारण उसके पुच्छ काल में ही दहन करना शास्त्र अनुसार शुभ बताया गया है। फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन 3 मार्च को शाम 5:07 बजे होगा। लेकिन पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश होने से होलिका दहन के मुहूर्त में बदलाव रहेगा। शास्त्रों में भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित बताया गया है, जबकि पुच्छ काल को अशुभ नहीं माना गया है। ऐसे में 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 02 मिनट (3 मार्च की सुबह) के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रहेगा।
3 को रहेगा सूतक
3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा है, यह ग्रहण 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक लगेगा। भारत में ग्रहण चन्द्रोदय के साथ शाम 6 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा और 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारम्भ हो जाता है।
यानि कि सुबह 9 बजकर 20 मिनट से सूतक लगेगा। सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य या उत्सव करना मना होता है। इसलिए रंगोत्सव करना शास्त्र सम्मत नहीं है, इसके चलते 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी। चंद्रग्रहण और सूतक की वजह से 4 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।
4 को होगा रंगोत्सव
जब चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय हो, उसी दिन वसंतोत्सव अथवा रंगोत्सव मनाया जाना चाहिए। इस वर्ष 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए शास्त्रीय मर्यादा और लोक परंपरा के अनुसार 4 मार्च को ही पूरे देश में रंगोत्सव के रूप में होली मनाई जाएगी।
होलिका दहन के लिए जरूरी
ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि शास्त्रों (धर्मसिंधु व निर्णयसिंधु) के अनुसार होलिका दहन के लिए सही समय का चुनाव करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
पूर्णिमा तिथि: होलिका दहन के समय पूर्णिमा तिथि का होना आवश्यक माना गया है। जिस दिन सूर्यास्त के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहे, उसी दिन होलिका दहन करना चाहिए।
भद्रा रहित मुहूर्त: भद्रा काल के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसे में भद्रा न होने का मुहूर्त चुनना चाहिए। भद्रा जब चरम पर हो तब होलिका दहन करना वर्जित माना गया है। प्रदोष काल में भद्रा होने पर, भद्रा का समय खत्म होने तक इंतजार करना चाहिए।
भद्रा पूंछ: अगर भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक रहती है और दहन के लिए समय नहीं बचता, तो आपातकालीन स्थिति में 'भद्रा पूंछ' के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। लेकिन 'भद्रा मुख' में दहन कभी नहीं करना चाहिए।
