तहव्वुर राणा की नागरिकता को रद्द करेगा कनाडा, भारत यात्रा से पहले पीएम मार्क कार्नी सरकार का बड़ा कदम

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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टोरंटो। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा की सरकार 2008 के मुंबई आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने के आरोपी पाकिस्तान मूल के व्यवसायी तहव्वुर राणा हुसैन की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। राणा (64) पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी रहा है। हेडली अमेरिकी नागरिक है। 

'ग्लोबल न्यूज' को मिले दस्तावेजों के अनुसार, आव्रजन अधिकारियों ने राणा को सूचित किया है कि वे 2001 में उसे प्राप्त उसकी कनाडाई नागरिकता छीनने पर विचार कर रहे हैं। राणा 1997 में कनाडा आया था और बाद में अमेरिका में एक डेनिश अखबार के कर्मचारियों पर हमले की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। मुंबई में 26/11 हमले के कथित मास्टरमाइंड राणा को अप्रैल 2025 में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। 

नयी दिल्ली पहुंचते ही राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। मुंबई हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 'आव्रजन, शरणार्थी और नागरिकता कनाडा (आईआरसीसी)' ने अपने निर्णय में कहा कि राणा की नागरिकता आतंकवाद के आरोप में नहीं, बल्कि आवेदन पत्र में झूठी जानकारी देने के कारण रद्द की जा रही है। 

राणा ने 2000 में नागरिकता के लिए आवेदन करते समय दावा किया था कि वह पिछले चार वर्षों से ओटावा और टोरंटो में रह रहा था और केवल छह दिन ही देश से बाहर रहा। हालांकि, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की जांच में पाया गया कि वह लगभग पूरा समय शिकागो में रहा, जहां उसके कई व्यवसाय और संपत्तियां थीं। नागरिकता रद्द करने के निर्णय में उस पर ''गंभीर और जानबूझकर धोखाधड़ी'' का आरोप लगाया गया है। 

खबर के अनुसार, सरकार ने कहा कि मामला फेडरल कोर्ट को भेजा गया है, जो अंतिम फैसला करेगा। राणा के वकील ने इस निर्णय को चुनौती दी है। आव्रजन विभाग की प्रवक्ता रोजी सैबेटर ने 'ग्लोबल न्यूज' को बताया कि गलत जानकारी देकर प्राप्त की गई नागरिकता को रद्द करना ''कनाडाई नागरिकता की शुचिता बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है।'' उन्होंने कहा कि प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संघीय अदालत ही करती है। उन्होंने कहा, ''सरकार नागरिकता रद्द करने के कदम को हल्के में नहीं लेती है।

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