बस स्टेशन को तरस रही पर्यटन नगरी देवा, 10 दिन सुविधा..बाकी 355 दिन बदहाली

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Published By Anjali Singh
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दीपराज सिंह/बाराबंकी, अमृत विचार। जिले में पर्यटन नगरी और गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल देवा आज भी स्थायी बस स्टेशन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है। आजादी के दशकों बाद भी यहां नियमित बस अड्डा न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। देवा मेला के नाम पर बना बस स्टेशन कस्बे से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बाराबंकी मार्ग पर स्थित है, जिसका संचालन वर्ष में केवल 10 दिन कार्तिक मेले के दौरान होता है। शेष 355 दिन परिसर सुनसान पड़ा रहता है और प्राइवेट वाहनों का अस्थायी स्टैंड बन जाता है। 

सूफी संत की पावन सरजमीं पर देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं, छात्रों व दैनिक यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। बस कब और कहां रुकेगी, इसकी कोई निश्चित व्यवस्था नहीं है। मजबूरन लोगों को प्राइवेट ऑटो व अन्य साधनों से मनमाना किराया देकर सफर करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष देवा महोत्सव के दौरान अस्थायी व्यवस्थाएं तो कर दी जाती हैं, लेकिन मेला समाप्त होते ही बस स्टेशन फिर वीरान हो जाता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस कस्बे को अब स्थायी परिवहन सुविधा की दरकार है।

नगर पंचायत देवा अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों मधु निगम सहित क्षेत्र की प्रियंका सिंह, मंजू सिंह, दिनेश श्रीवास्तव, सत्यनाम शर्मा, मनोज सोनी, तुलसी करमाकर, पिंकी श्रीवास्तव और कृतिका कृष्ण समेत कई लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि देवा बस स्टेशन को पूरे वर्ष नियमित रूप से संचालित किया जाए, ताकि देवा आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय यात्रियों को राहत मिल सके।

 

 

 

 

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