बेटी की शादी से ठीक पहले छुट्टी नहीं मिलने से टूट गया बीएलओ का दिल: फतेहपुर में शिक्षा मित्र ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में बयां किया दर्द
कानपुरः फतेहपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के तौर पर काम कर रहे एक शिक्षा मित्र ने अपनी बेटी की शादी के लिए छुट्टी नहीं मिलने से क्षुब्ध होकर कथित रूप से खुदकुशी कर ली। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि बीएलओ अखिलेश सविता (50) का शव शनिवार शाम को बिंदकी के आलियाबाद गांव के एक प्राइमरी स्कूल में लटका हुआ मिला। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह बाद उनकी बेटी की शादी थी। पुलिस के मुताबिक मौके से एक 'सुसाइड नोट' मिला है जिसमें कहा गया है कि अखिलेश एआईआर से जुड़ी ड्यूटी के कारण बहुत ज्यादा दबाव और तनाव में थे और एक सप्ताह बाद उनकी बेटी की शादी थी लेकिन बार-बार गुजारिश करने के बाद भी उन्हें छुट्टी नहीं दी जा रही थी।
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सुसाइड नोट में, अखिलेश ने कथित तौर पर लिखा था कि वह ''काम के दबाव से थक गए थे और यह कदम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि आठ मार्च को होने वाली उनकी बेटी की शादी की तैयारियां छुट्टी नहीं दिये जाने की वजह से अधूरी रह गईं हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अखिलेश की खुदकुशी की खबर मिलने पर उनके परिवार के लोग स्कूल पहुंचे और उन्हें नीचे उतारकर बिंदकी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सूत्रों के अनुसार इस घटना के बाद अस्पताल में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने प्रशासन पर छुट्टी के लिए बार-बार की गई गुजारिश को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने बताया कि पुलिस क्षेत्राधिकारी गौरव शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जब शव को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की तो तनाव बढ़ गया, जिसके बाद गुस्साए परिवार वाले शव को अस्पताल से निकालकर गांव ले गए।
सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि एसडीएम ने बेटी की शादी होने के बावजूद अखिलेश को छुट्टी नहीं दी। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने बाद में घंटों की बातचीत के बाद परिवार को शांत किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। अखिलेश के परिवार में उनकी पत्नी मंजू देवी, बेटी दिव्यांशी (20) और बेटा दिव्यांश है।
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परिजन ने आरोप लगाया है कि कई हफ्तों से छुट्टी मांगने के बावजूद अखिलेश को चुनाव से जुड़े काम जारी रखने के लिए मजबूर किया गया। अखिलेश के भाई भूपेश कुमार ने दावा किया कि बीएलओ की ड्यूटी से कुछ समय के राहत के लिए अधिकारियों से बार-बार अनुरोध किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अखिलेश की पत्नी ने भी आत्महत्या की वजह एसआईआर के तहत बढ़ते काम का बोझ और बेटी की शादी से पहले छुट्टी नहीं मिलना बताया।
अपर जिलाधिकारी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि सुसाइड नोट की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। पुलिस के मुताबिक घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गयी है।
