Bareilly : गाय का फिंगरप्रिंट बताएगा दूध उत्पादन क्षमता

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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264 गायों पर शोध के बाद 98.76 प्रतिशत सटीकता, आईवीआरआई के वैज्ञानिक विकसित कर रहे एप

बरेली, अमृत विचार। जिस तरह मनुष्यों की पहचान उनके फिंगरप्रिंट से होती है और उसी आधार पर उनकी विशिष्टता तय की जाती है। ठीक उसी तर्ज पर गायों का फिंगरप्रिंट भी उनकी क्षमता बताएगा। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मोबाइल एप विकसित कर रहे हैं, जो गाय के थूथन (मजल) को स्कैन कर उसकी दूध उत्पादन क्षमता बताने में समर्थ होगा। यह तकनीक फिलहाल अंतिम चरण में है, जल्द ही आम पशुपालकों को इसका लाभ मिल सकेगा।

पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. अयोन तरफदार ने बताया कि जिस तरह मनुष्यों के फिंगरप्रिंट अद्वितीय होते हैं। उसी प्रकार से हर गाय के थूथन (मजल) पर भी अलग-अलग पैटर्न पाए जाते हैं। इन पैटर्न्स को रिजेज (लंबी रेखाएं) और बीड्स (छोटी गोल आकृतियां) में वर्गीकृत किया गया है। मनुष्यों की तरह गाय में भी खास बात यह है कि दुनिया की किसी भी दो गायों के थूथन का पैटर्न एक जैसा नहीं होता। इसी विशेषता को आधार बनाकर वैज्ञानिकों ने कन्वेन्शनल न्यूरल नेटवर्क (सीएनएन) तकनीक का इस्तेमाल किया है। जो तस्वीरों के माध्यम से सटीक विश्लेषण करती है। वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट के तहत आईवीआरआई संस्थान के डेयरी फार्म की 264 गायों पर गहन अध्ययन करते हुए 2640 इमेज को क्लिक किया गया। प्रत्येक गाय की अलग-अलग कोणों से 10-10 तस्वीरें ली गईं और उनके डेटा को वास्तविक दूध उत्पादन रिकॉर्ड से मिलाया गया। शोध के परिणाम बेहद प्रभावशाली रहे हैं। इस तकनीक ने 98.76 प्रतिशत तक की सटीकता हासिल की है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एप पशुपालकों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा। अब तक पशुपालकों को गाय खरीदते समय उसकी दूध देने की क्षमता का अनुमान अनुभव के आधार पर लगाना पड़ता था, जिससे कई बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। इस एप के जरिए किसान थूथन की फोटो अपलोड कर गाय की संभावित दूध उत्पादन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन प्राप्त कर सकेंगे। वैज्ञानिकों के शोध में यह भी सामने आया है कि गायों के थूथन के पैटर्न में लगभग तीन साल में हल्का बदलाव आता है जिसे एप के माध्यम से समय-समय पर अपडेट किया जा सकेगा। इस परियोजना में डा. स्वर्णलता, डा. हरिओम पांडेय, डा. मानस पात्रा, डा. मुकेश सिंह और डा. एके पांडेय भी शामिल रहे।

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