इजरायल में 'बम धमाकों' के बीच फंसे बाराबंकी के लाल : हवा में डिफ्यूज हो रही मिसाइलें, देवा के दर्जनों मजदूरों की थमी सांसें
बाराबंकी, अमृत विचार : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत और इजरायल-ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। इस महायुद्ध की तपिश अब बाराबंकी के गांवों तक पहुंच गई है, क्योंकि जिले के देवा थाना क्षेत्र अंतर्गत जगदीशपुर जैसे गांवों के दर्जनों युवक इजराइल में मजदूरी कर रहे हैं। वर्तमान में तेल अवीव के पास रमाला जैसे शहरों में युद्ध के साये के बीच रह रहे इन मजदूरों के परिजनों में गहरी चिंता देखी जा रही है। हालांकि, वहां मौजूद भारतीय श्रमिकों ने वीडियो कॉल के जरिए अपने परिवारों को ढांढस बंधाया है कि फिलहाल वे सुरक्षित स्थानों पर हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, देवा के जगदीशपुर गांव के रहने वाले अंकुर सिंह और राजपाल सिंह समेत करीब दो दर्जन से अधिक लोग इजराइल में राजगीर और शटरिंग का कार्य करते हैं। राजपाल सिंह करीब चार महीने पहले ही दोबारा काम पर इजराइल गए थे। जब गांव में इन परिवारों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि फिलहाल बातचीत और वीडियो कॉल का सिलसिला जारी है। मजदूरों ने बताया कि युद्ध की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल वहां काम बंद करा दिया गया है और सभी को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है। हालांकि हमले की खबरें लगातार मिल रही हैं, लेकिन अभी तक इन श्रमिकों के आसपास कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, जिससे परिजनों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।
वीडियो कॉल पर वहां के हालात साझा करते हुए अंकुर सिंह ने बताया कि इजराइल पर दागी जाने वाली मिसाइलें और बम अक्सर आसमान में ही 'डिफ्यूज' कर दिए जाते हैं, जिन्हें वे अपनी आंखों से देख पा रहे हैं। उधर, बाराबंकी के किंतूर गांव का ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई से पुराना नाता होने और ईरान में फंसे अन्य बाराबंकी वासियों की खबरों ने क्षेत्र में पहले ही तनाव पैदा कर रखा है। ऐसे में इजराइल में मौजूद इन मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण अब ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। परिजनों की बस यही उम्मीद है कि युद्ध की यह विभीषिका जल्द थमे और उनके अपने सुरक्षित वतन वापस लौट सकें।
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