ईरान में फंसे बाराबंकी के छात्र और मौलाना : हालात देखकर परिजन परेशान, नहीं हो पा रही ज्यादा बात
बाराबंकी, अमृत विचार : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के बाद बाराबंकी जिले के कई परिवार गहरी चिंता में हैं। जानकारी के मुताबिक, ईरान के धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र कुम शहर में बाराबंकी के एक दर्जन से अधिक छात्र, मौलाना और उनके परिजन मौजूद हैं। हमलों के बाद इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने से उनसे संपर्क टूट गया है, जिससे परिवारों की बेचैनी बढ़ गई है।
परिजन मस्जिदों में इकट्ठा होकर अपने प्रियजनों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्वदेश लाने की व्यवस्था की जाए। परिजनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
जानकारी के मुताबिक कुम में मौलाना जफर अब्बास उर्फ फैजी, मौलाना आबिद हुसैन काजमी, मौलाना अली मेहदी रिजवी, मौलाना सैयद काशिफ रिजवी जैदपुरी समेत कई लोग तालीम और धार्मिक कार्यों से जुड़े हैं। इनके साथ परिवार के सदस्य, बच्चे और रिश्तेदार भी वहीं रह रहे हैं। हमलों के तुरंत बाद कुछ लोगों से फोन पर बात हो सकी थी, लेकिन इंटरनेट सेवाएं बंद होने के बाद संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया। शहर स्थित दुर्गा पूरी अस्करी नगर निवासी परिजनों ने बताया कि हमले के तुरंत बाद बातचीत हुई थी। उस दौरान जानकारी मिली थी कि कुम शहर की सीमा के पास हमला हुआ है, हालांकि शहर के अंदर हालात सामान्य बताए गए थे। इसके बाद से संपर्क न हो पाने के कारण परिवार लगातार परेशान है।
कई वर्षों से ईरान में धार्मिक पढ़ाई कर रहे सैय्यद इमरान शकील का कहना है कि वहां के लोग अमन पसंद हैं और सामान्य परिस्थितियों में शहर शांत रहता है। उनके अनुसार मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट सेवाओं का ठप होना है, जिससे संवाद पूरी तरह रुक गया है। उन्होंने बताया कि उनके परिचित पिछले 15 वर्षों से वहां तालीम दे रहे हैं और शुरुआती सूचना के अनुसार सुरक्षित हैं। वहीं अधिवक्ता दिलकश रिजवी ने बताया कि शुरुआत में संपर्क हुआ था, लेकिन अब बातचीत पूरी तरह बंद है, जिससे सभी लोग तनाव में हैं।
