Moradabad: चूल्हे-चौके से निकलकर बनीं लखपति दीदी, दोना-पत्तल से बनी संबल

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। कहते हैं कि हुनर को किसी का साथ मिल जाए तो वह निखरता जरूर है। ऐसा ही साबित कर दिखाया है ग्रामीण परिवेश की रहने वाली डिलारी ब्लॉक के ग्राम झटपुरा की लक्ष्मी चौहान। कभी वह केवल चूल्हे चौके पर सीमित थीं लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने न केवल खुद को आर्थिक मजबूती दी बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार देकर उनकी स्थिति संभालने में सहायक बनीं।

लक्ष्मी चौहान की डगर इतनी आसान नहीं थी। 2019 के आखिर में उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर ''''राधे-राधे स्वयं सहायता समूह गठित किया। वह सचिव के रुप में इसको लीड कीं। संयुक्त परिवार से होने के चलते उन्हें परिवार की अड़चनों के साथ सामाजिक तानों ने भी तोड़ने की कोशिश की लेकिन अपने हौसले से उन्होंने चुनौतियों को पार किया और खुद के पैरों पर खड़ा होकर दूसरों के लिए भी सहारा बन गईं।

अपने कारोबार के लिए लक्ष्मी चौहान ने स्टार्टअप फंड और 1 लाख 10 हजार रुपये की सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) की मदद से सिंगल डाई वाली दोना-पत्तल की मशीन पहले लगाई, आमदनी बढ़ी तो डबल डाई वाली मशीन खरीद ली। प्रशिक्षण के अलावा यूट्यूब पर वीडियो देखकर उन्होंने काम में दक्षता हासिल की। उनकी जी तोड़ मेहनत और लगन की ही देन है कि पिछले साल 2025 में उन्हें सरकार ने लखपति दीदी का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

समूह से जुड़ी हैं 10 महिलाएं
लक्ष्मी के राधे-राधे स्वयं सहायता समूह में 10 महिलाएं जुड़ी हैं। इस समूह की सालाना आमदनी करीब 1 से 1.5 लाख रुपये अनुमानित है। अब पति भी उनके काम में सहयोग कर रहे हैं। समूह के द्वारा उत्पादित सामग्री को स्थानीय ठेले वालों के अलावा झटपुरा गांव के साथ ही आसपास के गांवों में भी पहुंचाती हैं।

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