दक्षिण एशिया में लैंगिक अंतर घटा, लेकिन रोजगार में महिलाएं पीछे... लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध में हुआ खुलासा

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: दक्षिण एशियाई देशों में दो दशकों में लैंगिक असमानता में धीरे-धीरे कमी आई है, लेकिन महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध “साउथ एशिया’ जेंडर डिवाइड: स्ट्रक्चरल एंड सोशल बैरियर्स” में कई तथ्यों का खुलासा किया गया है। विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. रोली मिश्रा और विष्णु कुमार ने अपने शोध में दावा किया है कि करीब 20 वर्षो में दक्षिण एशियाई देशों में लैंगिक भेदभाव में कमी आई है।

शोधकर्ताओं ने लैंगिक अंतर को समझने के लिए “जेंडर डिस्पैरिटी इंडेक्स (जीडीआई)” नामक एक नया सूचकांक विकसित किया है। यह सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और श्रम बाजार में भागीदारी जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर को मापता है। अध्ययन के अनुसार 2003 से 2022 के बीच बेहतर मातृ स्वास्थ्य सेवाएं, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और बाल मृत्यु दर में कमी आई है। यह अध्ययन भारत समेत पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, भूटान, नेपाल और मालदीव में लैंगिक असमानताओं का विश्लेषण पर आधारित है।

मालदीव, भूटान और श्रीलंका का बेहतर प्रदर्शन

मालदीव, भूटान और श्रीलंका लैंगिक असमानता कम करने में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों के रूप में सामने आए हैं। इन देशों ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार निवेश किया है, जिससे महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार हुआ और विकास के बेहतर परिणाम सामने आए।

भारत, बांग्लादेश और नेपाल मध्यम श्रेणी में

भारत, बांग्लादेश और नेपाल सूचकांक में मध्यम श्रेणी में आते हैं, जहां लैंगिक अंतर में कुछ सुधार देखने को मिला है। भारत में जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना और विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों ने महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार लाने में योगदान दिया है। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किया गया जेंडर इन्क्लूजन फंड भी शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थिति चिंताजनक

शोध में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लैंगिक असमानता अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है। इसके पीछे पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, लड़कियों के लिए सीमित शैक्षणिक अवसर और महिलाओं की आवाजाही व रोजगार पर सामाजिक और संस्थागत बाधा प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से अफगानिस्तान लैंगिक असमानता के मामले में सबसे नीचे स्थान पर है।

श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी सबसे बड़ी चुनौती

अध्ययन में यह भी रेखांकित किया गया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के बावजूद महिलाओं की लेबर मार्केट में भागीदारी अभी भी दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी चुनौती है। घरेलू काम और देखभाल की जिम्मेदारियों को महिलाओं का दायित्व मानने वाली सामाजिक धारणा, पर्याप्त चाइल्डकेयर सुविधाओं की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को सीमित करती हैं।

 

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