किसानों का है देश और किसान रो रहा…
किसानों का है देश और किसान रो रहा अन्नदाता देखो खुद ही भूखा सो रहा सड़कों पर अन्नदाता जुल्म सहे खूब चुप रह ना पाएंगे। तुम्हारी तानाशाही पे न सर झुकाएंगे।। मेहनत का कभी मोल यहां पा न सके हम। जिसके थे हकदार उसे पा न सके हम।। अब ठान लिया आर-पार हो के रहेगा। …
किसानों का है देश और किसान रो रहा
अन्नदाता देखो खुद ही भूखा सो रहा
सड़कों पर अन्नदाता
जुल्म सहे खूब चुप रह ना पाएंगे।
तुम्हारी तानाशाही पे न सर झुकाएंगे।।
मेहनत का कभी मोल यहां पा न सके हम।
जिसके थे हकदार उसे पा न सके हम।।
अब ठान लिया आर-पार हो के रहेगा।
कृषक विरोधी कोई ना सत्ता में रहेगा।।
कानून के विरोध में सड़कों पर आए हैं ।
अब डर नहीं किसी का कफन साथ लाए हैं।।
हो जिसमें भला सबका वो कानून लाइए।
जो छीन ले अधिकार उसे मत भिड़ाइये।।
-हरीश उप्रेती “करन”
