दूसरों की सीलिंग करने वाले नगर निगम की होने लगी कुर्कीः कोर्ट के आदेश पर नगर आयुक्त कार्यालय से फर्नीचर कुर्क, मचा हड़कंप

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : शेल्टर होम संचालन का भुगतान गंगा संस्थान को न करने के मामले में मंगलवार को कोर्ट के आदेश पर पहुंची टीम ने मंगलवार को नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की शुरू हो गई। मेज, कुर्सियां और इन्वर्टर बाहर निकाल लिया गया। इसी बीच नगर आयुक्त गौरव कुमार ने टीम को ये जानकारी दी कि वाद में न्यायालय में विचाराधीन है। 13 मार्च को कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ सुनवाई होनी है। इसके बाद टीम लौट गई।

गंगा संस्थान और नगर निगम के अधीन डूडा में विवाद चल रहा था। अधिवक्ता विवेक मिश्रा ने बताया कि गंगा संस्थान फर्म कैसरबाग में शेल्टर होम चला रही थी। सितंबर 2019 में नगर निगम ने संस्था का रिन्यूवल खत्म कर दिया, लेकिन इसकी जानकारी दिसंबर में दी। उसका भुगतान भी नहीं किया। इस पर फार्म ने सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था। नगर निगम को 2,17,000 रुपये का भुगतान करना है। किंतु अधिकारी लापरवाही बरतते रहे। भुगतान की रकम में 6 प्रतिशत की दर से करीब 1.5 वर्ष का ब्याज जोड़कर देना का आदेश है। भुगतान न करने पर कोर्ट ने नगर निगम कार्यालय को कुर्क करने का आदेश दिया है।

दोपहर करीब 2.30 बजे हजरतगंज कोतवाली पुलिस के साथ अमीन और गंगा संस्थान व अन्य नगर निगम पहुंचे। अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन सही जवाब नहीं मिला। टीम ने टेबल, कुर्सी, सोफा और इनवर्टर नगर आयुक्त के कार्यालय से बाहर निकाल दिया। पुलिसकर्मी कार्यालय से थोड़ी दूर चले गए, जिस पर वकीलों और पुलिस में तकरार भी हुई। अधिकारियों के आश्वासन और फोन आने पर टीम करीब 4 बजे लौट गई। नगर आयुक्त कार्यालय से निकाला गया सामान कर्मचारियों ने अंदर रख दिया। 2 सप्ताह बाद टीम ने डेट लगाने का आश्वासन दिया।

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यह है कोर्ट का आदेश

कोर्ट के आदेश पर 10 कंप्यूटर, 10 मेज, 50 कुर्सी, 25 अलमारी स्थित नगर निगम कार्यालय, त्रिलोकीनाथ मार्ग, लालबाग, जिला लखनऊ की कुर्की कर उसका कब्जा मुकदमे में जीती संस्था को 10 मार्च को करना है। इसके साथ ही इसका कब्जा डिक्रीदार को प्रदान करने के लिए पुलिस सुरक्षा बल प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

अपर नगर आयुक्त की लापरवाही आई सामने

चौकी पुलिस ने सोमवार को अपर नगर आयुक्त ललित कुमार को कुर्की संबंधी सूचना दे दी थी। किंतु उन्होंने इसकी सूचना नगर आयुक्त और विधि विभाग को नहीं दी गई। इस लापरवाही को लेकर अपर नगर आयुक्त से जवाब मांगा गया है। अपर नगर आयुक्त ललित कुमार ने कहा कि डूडा से कार्यदाई संस्था ने शेल्टर होम का काम किया था। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 13 मार्च को कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई होनी है।

 

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