यूपी में 900 नई अदालतों के गठन का मामला, हाईकोर्ट जल्द करेगा मामले में सुनवाई
अमृत विचार: 900 नई अदालतों के गठन के मामले में प्रमुख सचिव, विधि ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष उपस्थित होकर भरोसा दिलाया है कि एक माह में सक्षम स्तर पर औपचारिक प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। इस पर न्यायालय ने मामले की अगली सुनवायी के लिए 13 अप्रैल की तिथि नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गयी, एक जनहित याचिका पर पारित किया है।
याचिका में प्रदेश में 9149 अदालतों के गठन का मुद्दा है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय कमेटी ने अक्टूबर 2024 में ही पहले चरण में 900 अदालतों के गठन की बात सैद्धातिंक रूप से स्वीकार किया था। इनमें 225 एचजेएस स्तर के, 375 सिविल जज सीनियर डिवीजन और 300 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालतें हैं। हालांकि बात आगे न बढ़ पाने पर न्यायालय ने नाराजगी जताई थी तथा पिछली सुनवाई पर प्रमुख सचिव विधि को तलब कर लिया था।
संस्थान की जमीनों पर फिलहाल नहीं होगा निर्माण
लखनऊ, विधि संवाददाता। ला मार्टिनियर की जमीनों पर सड़क/फ्लाई ओवर बनाए जाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष एलडीए ने भरोसा दिलाया है कि फिलहाल वह उक्त जमीनों पर कोई निर्माण कार्य नहीं करेगी। वहीं न्यायालय को यह भी बताया गया कि बुधवार को मार्टिनियर चैरिटीज के ट्रस्टियों की इसी मामले पर बैठक होनी है। इस पर न्यायालय ने मामले की अगली सुनवायी के लिए 13 मार्च की तिथि नियत करते हुए, बैठक के निर्णय से अवगात कराने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने ला मार्टिनियर कॉलेज की याचिका पर पारित किया है। याचिका में कहा गया है कि कोठी मार्टिन साहब, गणेशगंज स्टेशन में कॉलेज की जमीनें हैं, जहां से ग्रीन कॉरीडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क व फ्लाई ओवर का निर्माण किए जाने की सरकार की योजना है। कहा गया कि उक्त निर्माण संस्थान की मालिकाना हक वाली जमीनों पर किया जा रहा है जबकि एलडीए, जिला प्रशासन अथवा राज्य सरकार ने इसके लिए न तो संस्थान की सहमति प्राप्त की है और न ही कोई अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की है।
याचिका पर सुनवायी करते हुए, 27 फरवरी को न्यायालय ने प्रश्नगत जमीनों के पैमाईश का आदेश दिया था। 9 मार्च को सुनवायी के दौरान न्यायालय ने पाया था कि पैमाईश की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है, इस पर जिलाधिकारी को हाजिर होने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन में उपस्थित हुए जिलाधिकारी विशाक जी को अगली सुनवायी पर पुनः उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत ही मनरेगा के श्रमिकों को मजदूरी
लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के तहत संचालित महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कार्यरत श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी वही होगी जो न्यूनतम मजदूरी अधनियम के तहत नियत की गई है। वहीं इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कृषि मजदूरों के लिए 252 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित है और यही धनराशि प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों के लिए भी निर्धारित की गयी है। राज्य सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद न्यायालय ने उपरोक्त टिप्पणी करते हुए, याचिका को निस्तारित कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने संदीप सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। याचिका में मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यरत कृषि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिए जाने की मांग की गई थी।
