Moradabad: नौकरी छोड़ शुरू की तैयारी, दूसरे प्रयास में हासिल की 116वीं रैंक

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। टीडीआई सिटी निवासी ऋषभ शर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 116वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। मूल रूप से बरेली के रहने वाले ऋषभ के पिता संजीव शर्मा एलआईसी में मुख्य प्रबंधक हैं, जबकि मां आभा शर्मा एलआईयू में कार्यरत हैं। उनकी सफलता के बाद परिवार और परिचितों में खुशी का माहौल है। अमृत विचार ने उनसे बातचीत की।

यूपीएससी की तैयारी के सवाल पर उन्होंने बताया कि स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही मन में कहीं न कहीं यूपीएससी की तैयारी करने का विचार आने लगा था। उस समय इंटरनेट और यूट्यूब पर टॉपर्स के इंटरव्यू और वीडियो देखता रहता था, जिससे यह समझने की कोशिश करता था कि तैयारी कैसे होती है और किन विषयों पर अधिक ध्यान देना जरूरी है। स्नातक पूरा करने के बाद नौकरी बैंगलुरु में कॉरपोरेट सेक्टर में लग गई। करीब डेढ़ साल तक नौकरी करने के बाद एहसास हुआ कि जिस कॉलेज से मैंने पढ़ाई की है, वहां के कुछ सीनियर्स यूपीएससी में सफल हो चुके हैं। तब लगा कि अगर वे कर सकते हैं तो मैं भी कोशिश कर सकता हूं।

नौकरी छोड़कर तैयारी करने के विषय पर कहा कि यह एक बड़ा निर्णय था, क्योंकि नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करना आसान नहीं था। इसलिए मैंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह तैयारी करने का फैसला लिया और उसी दिशा में काम शुरू किया। पहले प्रयास का अनुभव पर बताया कि प्रीलिम्स के लिए स्टैंडर्ड किताबों और यूट्यूब का सहारा लिया। 2024 में प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली, लेकिन मेंस की तैयारी उतनी मजबूत नहीं थी, इसलिए उस चरण में सफलता नहीं मिल पाई। बताया कि औसतन सात-आठ घंटे पढ़ाई की। कभी-कभी जरूरत पड़ने पर 10 से 12 घंटे भी पढ़ना पड़ता था। यही मानना है कि उतना ही पढ़ना चाहिए जितना दिमाग में ताजगी बनाए रखे। लंबे समय तक बहुत अधिक पढ़ाई कुछ दिनों तक ही संभव है, लेकिन नियमित और समझदारी से पढ़ने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

असफलता के बाद दोबारा तैयारी
ऋषभ ने बताया कि उस समय मन में दोबारा नौकरी करने का विचार आया, लेकिन शिक्षकों से बातचीत की तो उन्होंने सलाह दी कि एक और प्रयास जरूर करना चाहिए। माता-पिता और शिक्षकों ने भी मनोबल बढ़ाया। इसके बाद दोबारा पूरी लगन से तैयारी शुरू की। अखबार से करंट अफेयर्स पढ़कर नोट्स बनाए, जिसका मेंस और इंटरव्यू में काफी फायदा मिला।

युवाओं को दिया संदेश
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सलाह दी कि आत्मविश्वास कम न होने दें। कभी-कभी ऐसा होता है कि पढ़ाई से मन भटक जाता है और कुछ दिन पढ़ाई नहीं हो पाती, लेकिन यदि लक्ष्य मजबूत है तो फिर से लौटकर निरंतरता बनाए रखना जरूरी है। साथ ही तैयारी के साथ एक बैकअप प्लान भी रखना चाहिए।

सेल्फ स्टडी और कोचिंग
ऋषभ ने बताया कि मेरी नजर में सेल्फ स्टडी का बहुत महत्व है। इससे विद्यार्थी को किसी विषय को खुद पढ़कर समझने का मौका मिलता है। कई बार शिक्षक समझाते हैं तो बात स्पष्ट नहीं होती, लेकिन खुद पढ़ने पर अलग-अलग तरीकों से समझने की कोशिश की जा सकती है। अगर किसी के पास अच्छा मार्गदर्शन है और ऑप्शनल विषय पर अच्छी पकड़ है तो कोचिंग जरूरी नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो कोचिंग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

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