वाइल्ड लाइफ: मकाऊ: वर्षावनों का रंगीन और बुद्धिमान प्रहरी

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Published By Anjali Singh
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मकाऊ तोते प्रकृति के सबसे आकर्षक और रंगीन पक्षियों में गिने जाते हैं। बड़े आकार, चमकीले रंगों और लंबी, खूबसूरत पूंछ के कारण ये तुरंत ध्यान खींच लेते हैं। तोते परिवार के अन्य पक्षियों से इन्हें अलग पहचान देने वाली एक खास विशेषता इनके चेहरे का वह हिस्सा है, जहां पंख नहीं होते। यह बिना पंखों वाला भाग हर प्रजाति में अलग-अलग आकार और पैटर्न में दिखाई देता है, जिससे उनकी पहचान और भी विशिष्ट हो जाती है। मकाऊ का आकार भी काफी विविध होता है। सबसे छोटे हैन मकाऊ की लंबाई लगभग 30 सेंटीमीटर (करीब 12 इंच) होती है, जबकि हायसिंथ मकाऊ दुनिया के सबसे बड़े तोतों में गिना जाता है और इसकी लंबाई लगभग 102 सेंटीमीटर (करीब 40 इंच) तक पहुंच सकती है। 

इस विशालकाय मकाऊ का वजन लगभग 1550 से 1600 ग्राम तक होता है। अपने आकर्षक रूप और प्रभावशाली आकार के कारण यह पक्षी प्रकृति प्रेमियों के बीच विशेष लोकप्रिय है। भोजन की बात करें तो अधिकांश मकाऊ मुख्य रूप से बीज, मेवे और फलों पर निर्भर रहते हैं। उनकी मजबूत और शक्तिशाली चोंच उन्हें कठोर खोल वाले खाद्य पदार्थों को भी आसानी से तोड़ने में सक्षम बनाती है। ब्राजील नट्स जैसे सख्त छिलके वाले मेवे भी उनके लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं होते। यही वजह है कि मकाऊ की चोंच को प्रकृति की अद्भुत रचनाओं में से एक माना जाता है। 

प्रजनन के समय मादा मकाऊ आमतौर पर एक से तीन अंडे देती है। अंडों से बच्चे निकलने में लगभग 26 से 29 दिन का समय लगता है, हालांकि यह अवधि प्रजाति के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। रोचक बात यह है कि नर और मादा दोनों मिलकर अपने अंडों और चूजों की रक्षा करते हैं। वे अपने घोंसले आमतौर पर ऊंचे पेड़ों के खोखलों या चट्टानों की दरारों में बनाते हैं, जहां उनके बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। मकाऊ सामाजिक और अत्यंत संवेदनशील पक्षी होते हैं। 

मध्य और दक्षिण अमेरिका के वर्षावन इनके प्रमुख निवास स्थान हैं, हालांकि कुछ प्रजातियां अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्रों में भी पाई जाती हैं। जंगली इलाकों में मकाऊ अक्सर मिट्टी के ऊंचे ढेरों या पहाड़ियों पर इकट्ठा होते हैं, जिन्हें ‘मकाऊ लिक्स’ कहा जाता है। यहां वे झुंड बनाकर मिट्टी खाते हैं, जो उनके पाचन तंत्र के लिए लाभकारी मानी जाती है। इन पक्षियों की बुद्धिमत्ता भी उल्लेखनीय है। मकाऊ चंचल और जिज्ञासु होते हैं तथा वे मनुष्यों की आवाजों की नकल करने में भी सक्षम होते हैं। उड़ान में भी ये कम नहीं, ये लगभग 56 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकते हैं।