गाजियाबाद बना आवासीय सौर ऊर्जा का मॉडल: DM ने जारी किया आदेश, रूफटॉप सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले ने आवासीय सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया है। औरैया की पहल से प्रेरित होकर गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब नए बनने वाले आवासीय भवनों के नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में सोलर रूफटॉप सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक़ इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। 

प्रशासन का मानना है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में ऊर्जा संकट से भी राहत मिलेगी। प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम, नगर पालिकाएं और नगर पंचायतें अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में प्रस्ताव पारित कर इस व्यवस्था को लागू कर सकती हैं। नक्शा स्वीकृति के बाद भवन निर्माण के दौरान सोलर पैनल और वर्षा जल संचयन प्रणाली का क्रियान्वयन अनिवार्य होगा। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का दायरा व्यापक होने की उम्मीद है। राज्य सरकार गाजियाबाद की इस पहल को अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय मान रही है। 

सरकार का मानना है कि प्रदेश के सभी जनपद स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर नीतिगत निर्णय लेकर आवासीय सोलर कवरेज बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 1440 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिससे प्रतिदिन 60 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह बिजली बिना कोयला जलाए उत्पन्न हो रही है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों में भी कमी आई है। 

रूफटॉप सोलर के माध्यम से आम नागरिकों को प्रतिदिन औसतन करीब चार करोड़ रुपये की बिजली बचत का लाभ मिल रहा है। इस पहल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। लगभग 60 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

इसके साथ ही सोलर रूफटॉप मॉडल के कारण 5000 एकड़ से अधिक भूमि का संरक्षण संभव हुआ है, जिसे अन्य विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रदेश के अन्य जनपदों में भी लागू होता है तो उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है और हरित भविष्य की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 

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