MGUG : एमजीयूजी का एआई आधारित क्लिनिकों की स्थापना पर जोर

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Published By Deepak Mishra
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित क्लीनिकों की स्थापना पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के अंतर्गत पूर्वांचल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य सेवा नवाचार तथा स्टार्टअप पारितंत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एमजीयूजी, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी; एमपीआईटी. के सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस तथा गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज; जीआईएमएस., ग्रेटर नोएडा के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के मध्य एक त्रिपक्षीय एमओयू; मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग .समझौता ज्ञापन. पर शनिवार को हस्ताक्षर किए गए। 

एमजीयूजी में हुए एमओयू समारोह की अध्यक्षता कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने की। समझौते पर एमजीयूजी की तरफ से कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार, एमपीआईटी की तरफ से निदेशक डॉ. सुधीर अग्रवाल तथा जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन की तरफ से मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल सिंह अमृतराज ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा के निदेशक डॉ. ;ब्रिगेडियर, राकेश कुमार गुप्ता ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता कर विचार विमर्श किया।

एमओयू पर हस्ताक्षर के दौरान हुए विचार.विमर्श में एआई आधारित क्लीनिकों की स्थापना तथा पूर्वांचल में स्टार्टअप पारितंत्र को प्रोत्साहित करने पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इस सहयोग के अंतर्गत महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व सहयोग से स्थापित उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना तथा एनवीडिया आधारित ग्राफिक्स प्रसंस्करण प्रणाली से युक्त संगणन सुविधाओं के माध्यम से तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। 

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग प्रदान करेगा जबकि गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन, ग्रेटर नोएडा नवप्रवर्तन संवर्धन सहयोग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित क्लीनिक पारितंत्र के विकास में सहयोग करेगा। त्रिपक्षीय एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने कहा कि यह पहल पूर्वी उत्तर प्रदेश में नवाचार, अनुसंधान, कौशल उन्नयन तथा प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य समाधान को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगा तथा क्षेत्र के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों तथा स्टार्टअप उद्यमों के लिए नई संभावनाएं सृजित करेगा। 

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