शहर के 700 से अधिक निजी अस्पताल आग के मुहाने पर... दो वर्षों में 100 से अधिक अस्पतालों को जारी हुए नोटिस, इक्का-दुक्का पर हुई कार्रवाई
उड़ीसा के मेडिकल कॉलेज में आग लगने से एक बार फिर से लोगों में दहशत
लखनऊ, अमृत विचार : शहर में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते दुकानों और कॉम्प्लेक्स में निजी अस्पतालों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। अधिकांश अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों के आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता है। आग जैसी आपात स्थिति में यहां बचाव के समुचित इंतजाम भी नहीं हैं।
उड़ीसा के एक मेडिकल कॉलेज में सोमवार को लगी भीषण आग से 10 मरीजों की मौत और 11 से अधिक कर्मचारी घायल होने की घटना के बाद एक बार फिर से राजधानी लखनऊ के अस्पतालों में आग से बचाव को लेकर लोगों में दहशत का माहौल है।
शहर में पंजीकृत निजी अस्पतालों की संख्या 900 से अधिक है। इनमें से फायर एनओसी लगभग अस्पतालों के पास ही है। ऐसे में 700 से अधिक अस्पताल बिना एनओसी के संचालित हो रहे हैं। हालांकि, बिना पंजीकरण के अस्पताल संचालित होने की संख्या जिले में पांच हजार से भी अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई नोटिस तक सीमित
जिले में पांच हजार से अधिक निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से महज 900 का ही पंजीकरण है। स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में कई अस्पतालों में फायर एनओसी न मिलने की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई केवल नोटिस जारी करने तक ही सीमित रही। बीते दो वर्षों में विभाग ने 100 से अधिक अस्पतालों को नोटिस जारी किए, लेकिन इक्का-दुक्का अस्पतालों पर ही कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली गई।
पंजीकरण के लिए यह है नियम
अस्पताल के पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करना होता है। इसके बाद फायर और बॉयोमेडिकल वेस्ट की एनओसी सीएमओ ऑफिस में जमा करना होता है। अस्पताल में निकासी के दो गेट भी होने चाहिए। इसके बाद टीम अस्पताल जाकर जांच करती है। सभी मानक सही पाए जाने पर अस्पताल का पंजीकरण कर दिया जाता है।
पंजीकरण में ऐसे होता है खेल
जिम्मेदार अधिकारियों और अस्पताल संचालक की मिलीभगत से अवैध संचालन होने लगता है। पंजीकरण के समय अधिकारयों द्वारा जांच के नाम पर अस्पताल में कमियां निकाली जाती हैं। जिन्हें अस्पताल संचालक द्वारा जल्द पूरी कराने का प्रार्थना पत्र लेकर अस्पताल संचालन का मौखिक आदेश जारी कर दिया जाता है।
राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में हाल ही में हुई घटनाएं
-14 अप्रैल 2025 : लोकबंधु अस्पताल के आईसीयू में आग लग गई थी। जिसमें एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी।
-18 दिसंबर वर्ष 2023: पीजीआइ की ओटी में वेंटीलेटर में आग लगने से दो की मौत
-जुलाई वर्ष 2017: केजीएमयू में आग लगने से पांच लोगों की हुई थी मौत।
-2 जनवरी, 2024: सिविल अस्पताल की पैथेलाजी में आग लगने से मची भगदड़।
निजी अस्पतालों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। कमियां मिलने पर नोटिस देकर जवाब मांगा जाता है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अस्पताल के संचालन पर रोक लगाई जाती है।
— डॉ. एपी सिंह, नोडल निजी अस्पताल
