बच्चों में जोड़ों का दर्द और सुबह की जकड़न को हल्के में न लें, ये गठिया की हो सकती है शुरुआत
लखनऊ, अमृत विचार : बच्चों के जोड़ों में सूजन या दर्द, सुबह उठते समय जकड़न, बार-बार बुखार, त्वचा पर चकत्ते या रैश, लंगड़ाकर चलना, अत्यधिक थकान और कमजोरी के साथ आंखों में लालिमा या दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाना चाहिए। ये लक्षण बच्चों में गठिया रोग के संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और इलाज शुरू होने से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
यह जानकारी प्रो मुकेश मौर्य ने दी। वह एक निजी होटल में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला का सोसाइटी फॉर ऑस्टियोआर्थराइटिस रिसर्च (एसओएआर) लखनऊ शाखा और एकेडमी ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया की ओर से किया गया था।
डॉ. मुकेश मौर्य ने बताया कि जन्म से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों में होने वाले गठिया रोग का प्रमुख कारण अक्सर अनुवांशिक कारक होते हैं। ऐसे मामलों में शुरुआती पहचान और विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी होता है, ताकि बच्चों के जोड़ों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सके।
कार्यशाला में डॉ. एसके दास ने ऑस्टियोआर्थराइटिस और सीपीपीडी में सूजन के तंत्र और उनके प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उम्रदराज लोगों में गठिया एक सामान्य समस्या बनती जा रही है। इससे बचाव के लिए वजन नियंत्रित रखना और नियमित हल्का व्यायाम करना बेहद लाभकारी है, जिससे जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है और दर्द में राहत मिलती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो एके त्रिपाठी ने रूमेटोलॉजी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ पर चिंता जताते हुए कहा कि इन रोगों का शीघ्र निदान और उचित उपचार बेहद आवश्यक है।
इस अवसर पर डॉ. पूजा धाओन और डॉ. श्वेता अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शैक्षणिक कार्यक्रम में शहर के कई वरिष्ठ चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लेकर गठिया रोग के नवीनतम उपचार और प्रबंधन पर चर्चा की।
