रहीमाबाद में हेपेटाइटिस-बी जांच से राहत: तरौना-जालामऊ के 61 ग्रामीणों की रिपोर्ट नेगेटिव, लोहिया की रिपोर्ट पर सवाल... पहले 19 निकले थे पॉजिटिव
लखनऊ, अमृत विचार : रहीमाबाद क्षेत्र के तरौना और जालामऊ गांव में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की आशंका को देखते हुए मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाकर ग्रामीणों की जांच की। दोनों गांवों में कुल 61 लोगों का रैपिड टेस्ट किया गया, जिसमें सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाए गए मरीजों के परिवारों और उनके संपर्क में रहने वाले लोगों की जांच की जा रही है, ताकि संक्रमण के कारणों का पता लगाया जा सके। मंगलवार को टीम ने मुंशीखेडा, तरौना एवं ग्राम जालामऊ का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
तरौना गांव में 50 और जालामऊ गांव में 11 लोगों की जांच की गई। सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। हालांकि कुछ पीड़ित परिवारों ने जांच कराने से मना भी कर दिया है।
केजीएमयू की रिपोर्ट से राहत, लोहिया की जांच सवालों में
केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 14 ग्रामीणों के ब्लड सैम्पल की दोबारा जांच की। जिसमें 13 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। सिर्फ एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इससे पहले लोहिया संस्थान ने इन सभी लोगों के ब्लड सैम्पल की जांच की थी। सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। अब लोहिया संस्थान की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में आ गई है। हालांकि जिस तकनीक से लोहिया संस्थान ने जांच की थी। अभी उस तकनीक से केजीएमयू में जांच नहीं की गई है।
यह है मामला
रहीमाबाद में 24 फरवरी को रक्तदान शिविर आयोजित किया गया था। चार गांव के 19 लोगों ने रक्तदान किया था। बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने रक्तदान की प्रक्रिया पूरी कराई थी। सभी ब्लड यूनिट की जांच में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। ये जांचें बलरामपुर अस्पताल और लोहिया संस्थान में हुई थीं। सभी रक्तदाताओं में संक्रमण की पुष्टि से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। रविवार को सुबह 14 रक्तदाताओं के दोबारा ब्लड सैम्पल एकत्र किए गए। बाकी पांच लोग सैंपल देने नहीं आ सके। नमूनों को जांच के लिए केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भेजा गया। रक्त नमूने गलत वॉयल में आ गए। उसके बाद दोबारा सही वॉयल में नमूने मंगाए गए।
डायलिसिस के दौरान हो रहे संक्रमित, चूक होने की आशंका
बलरामपुर अस्पताल की खुली पीपीपी मॉडल डायलिसिस यूनिट में मरीजों के बीच हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण की आशंका पैदा हो गई है।
अस्पताल में कुल 14 डायलिसिस मशीन हैं, जिनमें से तीन मशीनों पर संक्रमित मरीजों की डायलिसिस होती है। वर्तमान में यहां 18 मरीज पंजीकृत हैं, इनमें से ज्यादातर डायलिसिस से पहले हेपेटाइटिस बी-सी संक्रमण से मुक्त थे। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि मरीज यही संक्रमण डायलिसिस के दौरान ही पाए गए, जिससे स्टाफ की चूक की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले भी डायलिसिस यूनिट में 30 से अधिक मरीज हेपेटाइटिस बी संक्रमित हो गए थे। उस समय भी मरीज डायलिसिस से पहले संक्रमण से मुक्त थे।
सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर संक्रमित मरीजों के पॉजिटिव होने की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा, “जांच में यदि कोई लापरवाही सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
