शिकायत निस्तारण और निगरानी तंत्र होगा और प्रभावी, राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद नियमावली-2026 को मंजूरी

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और शिकायतों के प्रभावी समाधान के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद एवं जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद (प्रथम संशोधन) नियमावली-2026” को मंजूरी दे दी गई।

नई नियमावली लागू होने के बाद राज्य और जिला स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण परिषदों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना है। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत राज्य और जिला स्तर पर परिषदों का गठन किया जाता है, जो उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों, शिकायतों और नीतिगत सुझावों पर सरकार को सलाह देती हैं। नई नियमावली के माध्यम से परिषदों के गठन, सदस्यों की नियुक्ति, बैठक की प्रक्रिया और कार्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।

नियमावली के अनुसार राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद की अध्यक्षता राज्य सरकार द्वारा नामित मंत्री करेंगे, जबकि परिषद में विभिन्न विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ, उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े सदस्य शामिल किए जाएंगे। इसी तरह जिला स्तर पर भी जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। सरकार का मानना है कि परिषदों के सक्रिय होने से उपभोक्ताओं को बाजार में होने वाली अनियमितताओं, भ्रामक विज्ञापनों, घटिया उत्पादों और सेवा संबंधी शिकायतों के मामलों में बेहतर मंच मिलेगा। परिषदें समय-समय पर बैठक कर उपभोक्ता हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगी और आवश्यक सुधारों के लिए सरकार को सुझाव देंगी।

नई नियमावली में परिषदों की नियमित बैठक, कार्यों की समीक्षा और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया गया है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और शिकायतों के त्वरित समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस व्यवस्था से उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूती मिलेगी और बाजार में जवाबदेही बढ़ेगी। इससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ-साथ निष्पक्ष व्यापारिक वातावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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