हाईकोर्ट : जीएसटी रिश्वत मामले में आईआरएस अधिकारी की जमानत याचिका खारिज

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने झांसी में उपायुक्त (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) के पद पर तैनात रही भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी प्रभा भंडारी को 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने भंडारी की जमानत याचिका पर 10 मार्च को यह आदेश पारित किया। 

पीठ ने कहा कि रिश्वत के लेनदेन से कथित तौर पर जुड़ी बातचीत की रिकॉर्डिंग समेत रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उपायुक्त के पद पर तैनात रहीं भंडारी ने जीएसटी चोरी का मामला निपटाने के लिए व्यवसायियों से 1.5 करोड़ रुपये रिश्वत की मांग की थी। 

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छापेमारी में एक सह आरोपी अधिकारी से 70 लाख रुपये बरामद किए थे। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उनके पास से सीधे कोई बरामदगी नहीं हुई और यह मामला सह आरोपी अजय शर्मा के बयानों पर आधारित है। 

यह दलील भी दी गई है कि याचिकाकर्ता गर्भवती है और उसका एक साल का बेटा है और जांच पूरी हो चुकी है एवं आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है। जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई ने याचिकाकर्ता और सह आरोपी के बीच रिकॉर्ड की गई बातचीत का हवाला दिया और दावा किया कि इसमें रिश्वत की रकम और इसे सोने में बदलने की बातचीत के संकेत मिलते हैं। 

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