मार्च में आकाश दर्शन

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Published By Anjali Singh
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आकाश में चंद्रमा और तारों (या ग्रहों) को देखने का रोमांच कुछ ऐसा है जो दिल को छू लेता है। यह सिर्फ देखना नहीं, बल्कि महसूस करना है, जैसे ब्रह्मांड खुद आपको बुला रहा हो, और आप उसकी विशालता में खो जाना चाहें। ख़ासकर जब चंद्रमा किसी चमकीले ग्रह के पास आता है, तो वह दृश्य रोमांटिक, रहस्यमयी और जादुई लगता है। अब चंद्र ग्रहण से आगे चलते हैं और इस रोमांच पर विस्तार से बात करते हैं कि मार्च, 2026 में आकाश में और क्या घटित होने वाला है।-डॉ इरफ़ान ह्यूमन

चंद्रमा और शुक्र का संयोजन 

20 मार्च को चंद्रमा और शुक्र का संयोजन की घटना घटित होगी, जहां चंद्रमा शुक्र के उत्तर में लगभग 4.4°-4.6° की दूरी पर होगा। समय यूटीसी में शाम, भारत में सूर्यास्त के समय (लगभग 18:30-19: 00 आईएसटी) दिखेगा। चंद्रमा सिर्फ 1-5 प्रतिशत प्रकाशित (बहुत पतला क्रिसेंट) होगा। शुक्र बहुत चमकीला ¼-4 magnitude के आसपास) होगा, जो शाम का सबसे चमकीला तारा (संध्या तारा) के रूप में दिखाई देगा। यह पश्चिमी आकाश में निम्न क्षितिज पर होगा और चंद्रमा उसके ऊपर/पास दिखेगा। यह दृश्य सिर्फ 30-60 मिनट तक रहेगा, क्योंकि दोनों जल्दी अस्त हो जाएंगे। इस दृश्य को सूर्यास्त के ठीक बाद पश्चिम में देखा जा सकता है। इसे देखने के लिए कोई दूरबीन की ज़रूरत नहीं होगी। यह इस माह का सबसे आसान और चमकीला संयोजन होगा।

सूर्य ठीक भूमध्य रेखा पर

20 मार्च को मार्च विषुव  की घटना घटित होगी। यह घटना 14:46 यूटीसी  ¼Coordinated Universal Time½ और 8:16 पीएम आईएसटी (Indian Standard Time) पर होगी, तब सूर्य सीधे भूमध्य रेखा पर चमकता दिखाई देगा और दुनिया भर में दिन और रात लगभग बराबर होंगे। यह उत्तरी गोलार्ध में वसंत का पहला दिन भी होता है और दक्षिणी गोलार्ध में पतझड़ अर्थात शरद ऋतु विषुव  का पहला दिन भी। अर्थात उत्तरी गोलार्ध में वसंत की शुरुआत और सर्दियों के अंत को चिह्नित करने के लिए मार्च विषुव को लिया जा सकता है लेकिन दक्षिणी गोलार्ध में शरद ऋतु की शुरुआत और गर्मियों की समाप्ति को चिह्नित करता है। 

यह हर साल 19, 20 या 21 मार्च के बीच पड़ता है। 2026 में यह ठीक 20 मार्च को है। एक सामान्य वर्ष के लिए गणना किए गए समय में कमी पिछले वर्ष की तुलना में 5 घंटे 49 मिनट बाद है, और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18 घंटे 11 मिनट पहले लीप वर्ष के लिए है। खगोल विज्ञान में, मार्च विषुव काल के नाक्षत्र समय का शून्य बिंदु माना जाता है।

विषुव ऐसा समय-बिंदु होता है, जिसमें दिवस और रात्रि लगभग बराबर होते हैं। इसका शब्दिक अर्थ होता है-समान। किसी क्षेत्र में दिन और रात की लंबाई को प्रभावित करने वाले कई दूसरे कारक भी होते हैं। पृथ्वी अपनी धुरी पर 23 1/2 डिग्री झुके हुए सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है। इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है। 

इस स्थिति को विषुव या इक्विनॉक्स कहा जाता है। इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की लंबाई लगभग बराबर होती है। यदि दो लोग भूमध्य रेखा से समान दूरी पर खड़े हों तो उन्हें दिन और रात की लंबाई बराबर महसूस होगी। ग्रेगोरियन वर्ष के आरंभ होते समय (जनवरी माह में) सूरज दक्षिणी गोलार्ध में होता है और वहां से उत्तरी गोलार्ध को अग्रसर होता है। वर्ष के समाप्त होने  (दिसम्बर माह) तक सूरज उत्तरी गोलार्ध से होकर पुनः दक्षिणी गोलार्द्ध पहुचं जाता है। इस तरह से सूर्य वर्ष में दो बार भू-मध्य रेखा के ऊपर से गुज़रता है। 

चंद्रमा और बृहस्पति का संयोजन

26 मार्च को चंद्रमा और बृहस्पति का संयोजन  की घटना घटित होगी, जहां चंद्रमा बृहस्पति के उत्तर में लगभग 3.5° की दूरी पर होगा। समय यूटीसी में दोपहर, भारत में रात के समय (शाम से मध्यरात्रि तक) दिखेगा। चंद्रमा 58 प्रतिशत प्रकाशित  होगा। इसकी दृश्यता की बात करें तो बृहस्पति का मैग्नीट्यूड -2.3 के आसपास बहुत चमकीला होगा। यह रात में दक्षिणी आकाश में ऊंचा दिखेगा। चंद्रमा उसके पास होगा, जो एक शानदार जोड़ी बनेगी। दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप से बृहस्पति के 4 गैलीलियन चंद्रमा भी दिख सकते हैं। इस घटना को शाम 7-8 बजे से रात भर दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में देखें।