कानपुर में 2.66 करोड़ से ज्यादा की जीएसटी चोरी उजागर, एक गिरफ्तार, जानें पूरा मामला
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में जीएसटी टैक्स चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने फर्जी कंपनी बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) फ्रॉड करने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त अपराध श्रवण कुमार सिंह ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों को बताया कि थाना कल्याणपुर क्षेत्र में दर्ज मुकदमे की जांच में लगभग 2.66 करोड़ रुपये की कर चोरी सामने आई थी।
मामले में अब तक तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। तीसरे अभियुक्त दीपक उर्फ मोगली को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपियों ने "अपूर्वा ट्रेनिंग कंपनी" के नाम से फर्जी फर्म बनाकर मूंगफली समेत अन्य वस्तुओं की सप्लाई दर्शाते हुए फर्जी आईटीसी क्लेम किया। आरोपी के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य सरगना राकेश साहू फरार है और उसके झांसी में होने की सूचना है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम प्रयासरत है। पुलिस ने बताया कि जांच में 5 से 7 संदिग्ध कंपनियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनके माध्यम से फर्जी लेन-देन किया गया। मामले की विवेचना जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
उन्होने बताया कि थाना कल्याणपुर क्षेत्र में जीएसटी टैक्स चोरी से संबंधित एक मुकदमा पंजीकृत किया गया था, जिसमें लगभग दो करोड़ 66 लाख रुपये की कर चोरी का मामला प्रकाश में आया। जांच के दौरान अब तक कुल तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पहले 2 अभियुक्तों को पूर्व में गिरफ्तार किया गया था। तीसरे अभियुक्त दीपक उर्फ मोगली को आज गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।
दीपक उर्फ मोगली के कब्जे से आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्तों द्वारा "अपूर्वा ट्रेनिंग कंपनी" नाम से फर्जी कंपनी बनाई गई थी। इस फर्जी कंपनी के माध्यम से मूंगफली एवं अन्य वस्तुओं की सप्लाई दर्शाकर फर्जी आईटीसी जारी किया गया। इसी आधार पर लगभग 2.66 करोड़ की कर चोरी का लाभ लिया गया।
पूछताछ में यह भी ज्ञात हुआ कि गिरोह का मुख्य अभियुक्त राकेश साहू है, जो वर्तमान में फरार है और झांसी में होने की सूचना है। उसकी गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीम सक्रिय रूप से प्रयासरत है। यह एक संगठित गिरोह है, जिसमें मुख्य अभियुक्त के अलावा अन्य सदस्य सहयोगी (सब्सिडियरी) के रूप में कार्य कर रहे थे।
जांच के दौरान 5 से 7 संदिग्ध कंपनियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनके माध्यम से फर्जी लेन-देन एवं आईटीसी क्लेम किया गया। संबंधित ट्रांसपोर्टर एवं दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है। उन्होने बताया कि जिन-जिन व्यक्तियों/कंपनियों के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी। प्रकरण की विवेचना प्रगति पर है तथा शीघ्र ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर केस के निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी।
