भदोही की भद्रकाली के दर्शन पूजन का विशेष महत्व, नवरात्र में उमड़ रहा श्रद्धा का सैलाब, 51 शक्तिपीठों में से एक
भदोही। बासंतिक नवरात्र की शुरुआत के साथ मां भद्रकाली के दिव्य व उग्र स्वरूप की पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भारी भरकम भीड़ उमड़ रही है। शनिवार के दिन बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावनाओं के बीच मंदिर प्रबंधन ने तैयारियां पूरी कर ली है।
जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर काशी प्रयाग के मध्य तीन जनपदों भदोही-वाराणसी और जौनपुर के मिलान बिंदू पर बनारस के राजस्व गांव सरावां में अवस्थित मां भद्रकाली धाम में वैसे तो पूरे वर्ष भर चहल-पहल बनी रहती है, लेकिन नवरात्र में विशेषकर शनिवार के दिन दर्शन पूजन का विशेष महत्व बताया जाता है।
इस नवरात्र में मात्र एक शनिवार पड़ने से इस दिन का महत्व काफी बढ़ जाता है। शनिवार को भारी तादाद में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावनाओं के बीच मेला प्रबंधन समिति ने तैयारियां पूरी कर ली है। ख्यातिलब्ध ज्योतिष पंडित मिथिलेश उपाध्याय ने बताया कि मां भद्रकाली का प्राचीन मंदिर एक प्रसिद्ध शक्ति स्थल है। जो वरुणा और बसुही नदियों के संगम तट पर स्थित है।
जहां विशेषकर शनिवार और नवरात्र के दौरान भक्तों का सैलाब उमड़ता है। जो मां भवानी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां माता के दिव्य और उग्र रूप की पूजा होती है। मंदिर काशी क्षेत्र की दो पवित्र नदियों वरूणा व बसुही के संगम स्थल पर स्थित होने से इसका अपना एक अलग ही पौराणिक महामात्य है।
यह मंदिर न केवल एक तीर्थ स्थल, बल्कि स्थानीय संस्कृति और आस्था का भी एक बड़ा केंद्र भी है। मान्यता है कि नवरात्र के शनिवार को महामाया के धाम में मत्था टेकने से भक्तों की इच्छित कामनाएं पूरी होती हैं।
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