Bareilly : गिर मवेशियों के भ्रूण स्थानांतरण में 60% सफलता का दावा

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Published By Pradeep Kumar
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बरेली, अमृत विचार। कृषि व्यापार कंपनी बीएल एग्रो ने बृहस्पतिवार को बताया कि उसकी अनुषंगी कंपनी लीड्स जेनेटिक्स ने यहां अपने सुविधा केंद्र में ब्राज़ील से आयातित गिर मवेशियों के उच्च-गुणवत्ता वाले भ्रूण को देसी गायों में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया है। कंपनी ने दावा किया है कि पहले बैच में गर्भधारण की सफलता दर 60 प्रतिशत रही, जो उद्योग के मानकों के हिसाब से एक रिकॉर्ड है। ये भ्रूण ब्राज़ील की कंपनी फेजेन्डा फ्लोरेस्शिया से लिए गए थे। इन्हें 'ओवम पिक-अप इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन' (ओपीयू-आईवीएफ) तकनीक से तैयार किया गया था। ये गिर नस्ल के ऐसे मवेशियों से लिए गए हैं जिनमें प्रतिदिन 40 लीटर तक दूध देने की क्षमता है।

बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक, आशीष खंडेलवाल ने पत्रकारों को बताया कि भ्रूण स्थानांतरण के पहले बैच में शामिल 116 मवेशियों में गर्भधारण की सफलता दर 60 प्रतिशत रही है, जो उद्योग के मानकों के हिसाब से अपने आप में एक रिकॉर्ड है। भारत में देसी मवेशियों से दूध का औसत उत्पादन लगभग 4.5 लीटर प्रतिदिन है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन लंबे समय से यहां प्रति पशु कम उत्पादकता की समस्या बनी हुई है। भ्रूण स्थानांतरण का यह काम बरेली स्थित बीएल कामधेनु फार्म्स में किया गया। यहीं पर कंपनी का 'मवेशी प्रजनन और डेयरी प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र' भी स्थित है, जो अत्याधुनिक आईवीएफ, पैथोलॉजी और जीनोमिक्स प्रयोगशालाओं से सुसज्जित है। जिन गायों में भ्रूण स्थानांतरित किया गया, वे गिर, साहीवाल और होल्स्टीन फ़्रीज़ियन नस्ल की हैं। फेजेन्डा फ्लोरेस्शिया की पशु चिकित्सा विशेषज्ञ अमांडा फैंटुची, जो इस भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रिया की देखरेख कर रही थीं, ने बताया कि भारत में मिली सफलता दर ब्राज़ील की तुलना में कहीं ज़्यादा रही है।

लीड्स जेनेटिक्स अभी बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा की सरकारों से बातचीत कर रही है। इसका मकसद इस सुविधा केंद्र का इस्तेमाल करना और अलग-अलग राज्यों के देसी मवेशियों की नस्लों में सुधार के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर ब्रीडिंग फ़ार्म स्थापित करना है। अपनी बेहतरीन दूध उत्पादन और बीमारियों से लड़ने की ताकत के लिए मशहूर 'गिर' नस्ल, भारत के देसी मवेशियों की नस्ल में सुधार के कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है।

गिर गाय के ब्राज़ील पहुंचने की कहानी
गिर नस्ल के मवेशियों के ब्राज़ील पहुंचने की कहानी एक सदी से भी ज़्यादा पुरानी है। उस समय बड़ौदा के महाराजा ने एक गिर गाय ब्राज़ील के एक परिवार को उपहार में दी थी। इसके बाद ब्राज़ील ने दशकों तक चुनिंदा प्रजनन पर शोध किया और एक ऐसी वंशावली विकसित की, जिसे अब दूध उत्पादन के मामले में आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ माना जाता है। बीएल एग्रो के भ्रूण स्थानांतरण कार्यक्रम के ज़रिये अब वही वंशावली भारत वापस लौट आई है।

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