केजीएमयू में टीबी के बाद भी मुफ्त मिलेगा फेफड़ों का इलाज, पोस्ट टीबी मरीजों के लिए विशेष क्लीनिक की शुरुआत

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Published By Muskan Dixit
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देश में पहली पहल का दावा

लखनऊ, अमृत विचार : करीब 50 प्रतिशत टीबी मरीजों में इलाज के बाद भी फेफड़ों में धब्बे, घाव, फाइब्रोसिस, कैल्सीफिकेशन और सांस की नलियों में रुकावट जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। इलाज के बाद भी कई मरीज लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ और अन्य श्वसन संबंधी दिक्कतों से जूझते रहते हैं। ऐसे मरीजों का किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में निःशुल्क इलाज किया जाएगा। पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र में इलाज के लिए विशेष व्यवस्था शुरू की गई है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मरीजों की जांच कर दवाओं, एक्सरसाइज और विशेष थेरेपी के माध्यम से इलाज करेगी।

पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र के संस्थापक प्रभारी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम में अभी तक पोस्ट टीबी रोगियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी। विश्व टीबी दिवस पर केजीएमयू में एक नई पोस्ट टीबी डिजीज क्लीनिक की शुरुआत की जा रही है। ये देश में अपनी तरह की पहली सुविधा होगी। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस पहल को टीबी से उबर चुके मरीजों के लिए ''नई जिंदगी देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम'' बताया। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से हजारों मरीजों को दीर्घकालिक राहत मिलने की उम्मीद है।

टीबी के प्रमुख लक्षण

दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान, गर्दन में गांठ व बांझपन आदि।

इन्हें टीबी का जोखिम अधिक

- टीबी मरीज के साथ रहने वाले लोग।

-धूम्रपान या नशा करने वाले व्यक्तियों में सामान्य की अपेक्षा ढाई से तीन गुना अधिक संभावना।

-कुपोषित व्यक्ति को स्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा 10 गुना ज्यादा टीबी होने की सम्भावना।

-वायु प्रदूषण,या ऐसे व्यवसाय जिनमे धूल, धुआं होता है वहां काम करने वाले व्यक्तियों में।

-मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग जहां सूर्य की रोशनी कम होती है, सीलन रहती है।

-डायबिटीज, एचआइवी या कैंसर या किडनी सम्बन्धी बीमारी से ग्रसित लोगों को।

- कम उम्र में शादी वाली लड़कियों, ज्यादा बच्चे वाली व एनीमिक महिलाओं में।

टीबी ग्रसित व्यक्ति ये करें उपाय

खांसते सौर छींकते समय मुंह को ढंकें, मास्क पहने, नियमित संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करें। भोजन में अंकुरित अनाज, दालें, दूध , हरी सब्जियां, मौसमी फल और प्रोटीनयुक्त आहार शामिल करें। धूम्रपान या एल्कोहोल या अन्य कोई नशा कर रहे हैं तो उसे छोड़ दें। डायबिटीज को नियंत्रित रखें। तनाव या अवसाद में हैं तो जीवन शैली में बदलाव करें। फास्ट फूड, संरक्षित भोजन, कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन कम करें या नहीं करें। योग, प्राणायाम, ध्यान करें। नियमित 40-45 मिनट पैदल चलें, पर्याप्त नींद लें।

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