Lakhimpur kheri: हमला कर भाग नहीं सका तेंदुआ, ग्रामीणों ने रस्सी से बांधकर किया काबू

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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मझगईं, अमृत विचार। वन रेंज मझगई क्षेत्र के बेला कलां में मंगलवार दोपहर गन्ने के खेत में काम कर रहे दो मजदूरों पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया। इससे दोनों घायल हो गए। हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि, ग्रामीणों की बहादुरी और एकजुटता के चलते न सिर्फ दोनों मजदूरों की जान बचाई जा सकी, बल्कि तेंदुए को भी मौके पर ही काबू कर लिया गया। इस दौरान वन विभाग और ग्रामीणों के बीच काफी नोकझोंक भी हुई। वन विभाग ने घायलों को उपचार के लिए दस-दस हजार रुपये की धनराशि दी है। 

गांव बेला कलां में वेदराम मौर्य के खेत के पास लोहरा निवासी बबलू (38) पुत्र सुन्दर और रामनरेश (44) पुत्र पूरन गन्ने की गुड़ाई कर रहे थे। दोपहर के समय खेतों के पास घनी झाड़ियों में छिपा तेंदुआ अचानक बाहर निकला और दोनों मजदूरों पर झपट पड़ा। हमले की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि दोनों मजदूर संभल नहीं पाए और गंभीर रूप से घायल हो गए। मजदूरों की चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे अन्य लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ लोग जान बचाकर भागे, तो वहीं कई ग्रामीण हिम्मत जुटाकर मौके की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने पहले लाठी-डंडों और शोर-शराबे के जरिए तेंदुए को मजदूरों से दूर किया और फिर घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। 

इसके बाद ग्रामीणों ने संगठित होकर तेंदुए को घेरने की योजना बनाई। सैकड़ों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने चारों ओर से घेराबंदी कर दी। काफी देर तक चले इस जोखिम भरे प्रयास में कई बार तेंदुआ हमलावर होने की कोशिश करता रहा, लेकिन ग्रामीण पीछे नहीं हटे। अंततः रस्सियों की मदद से उसे काबू में कर बांध दिया गया। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। घटना की सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस दोनों घायलों को सीएचसी पलिया ले गई। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें गहरे जख्म आए हैं। इसी बीच वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि वन्यजीव वन विभाग की लापरवाही से ही नहीं पकड़े जा रहे हैं। 

पिछले कई दिनों से तेंदुआ हमले कर रहा है, लेकिन वन विभाग ने धरातल पर कुछ नहीं किया। पुलिस की मदद से  वन विभाग की टीम काफी मशक्कत के बाद तेंदुए को अपने कब्जे में लिया और उसे रेंज कार्यालय ले जाया गया। वहां उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया जाएगा और उसके बाद उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि अगर समय रहते वन विभाग सक्रिय होता, तो न तो मजदूरों को घायल होना पड़ता और न ही ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती। फिलहाल, इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है, और ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते हुए क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी बढ़ाने और तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
 
पहले भी तेंदुआ कई लोगों पर कर चुका हमला
बेला कलां और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए का आतंक कोई नई बात नहीं है। बीते कुछ महीनों में कई ग्रामीण इसके हमले का शिकार हो चुके हैं। 10 जनवरी को बेला निवासी वाजिद पर हमला हुआ था, वहीं रिंकी पुत्री धर्मेंद्र, रिजवान पुत्र लियाकत और अरविंद समेत कई अन्य लोग भी घायल हो चुके हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से लगातार अनदेखी की जा रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत और सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम समय पर नहीं पहुंचती। यही कारण है कि इस बार लोगों को खुद अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि विभाग सिर्फ कागजों में योजनाएं बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। मझगई रेंजर अंकित सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

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