सियासी अस्तित्व बचाने की जंग... बसपा अब चार राज्यों के चुनाव लड़ने पर कर रही मंथन
लोकसभा में वर्ष 2014 और 2024 में सबसे अधिक खराब प्रदर्शन रहा। यूपी विधान सभा चुनावों में भी 30 से फिसलकर 12 फीसदी वोटों पर आ पहुंची।
लखनऊ, अमृत विचार: यूपी में चार बार सत्ता संभालने वाली और कभी लोकसभा में सत्ताधारी दलों से अपनी बात मनवाने की ताकत रखने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपने सबसे खराब वक्त से जूझ रही है। हालात यह हैं कि बसपा का 403 सदस्यों वाली यूपी विधान सभा महज एक विधायक है, वहीं लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं हैं। अब सियासी वजूद बचाने के लिए बसपा वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु असम और केरल राज्यों के चुनावों में उतरने पर गंभीरता से मंथन कर रही है।
अनुसूचित जाति के दिग्गज नेता माने जाने वाले कांशीराम ने वर्ष 1984 में बसपा की स्थापना की थी। कठिन संघर्ष के बल पर स्थापना के महज पांच साल के बाद वर्ष 1989 में यूपी विधान सभा के चुनाव हुए। पहली बार में ही 19 सीटें जीतकर बसपा ने 9.41 फीसदी मत प्राप्त कर सभी को चौंका दिया था। उसके बाद बसपा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बसपा ने यूपी को मुख्य फोकस पर रखा तो 1991 में 12 सीटें पाकर 9.44 फीसदी मत, 1993 में 67 सीटें लाकर 11.12 फीसदी, 1996 में फिर 67 सीटें और फिर 2002 में संख्या बढ़कर 98 सीटें हो गई। साथ ही मत प्रतिशत भी बढ़कर 23.06 फीसदी पर जा पहुंचा।
इससे बसपा का हौसला बढ़ा और 2007 में 30.43 फीसदी वोट प्राप्त कर 206 सीटें लाकर यूपी में अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली थी। लेकिन उसके बाद पांच साल बाद हुए 2012 में बसपा का ग्राफ एकाएक गिर गया। 80 सीटें प्राप्त कर पार्टी को 25.91 फीसदी वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। उसके बाद ग्राफ इस कदर गिरा कि 2017 में 19 सीटें प्राप्त कीं और 22.23 फीसदी वोट प्राप्त किए, वहीं 2022 में 12.80 फीसदी वोट प्राप्त कर महज एक सीट पर आकर सिमट गई। बसपा के यूपी जैसे हालात अन्य राज्यों में भी रहे। 2022 में पंजाब में एक, 2025 के बिहार चुनाव में एक, राजस्थान के 2023 के चुनाव में दो और उत्तराखंड में हुए 2022 के चुनाव में दो सदस्य ही जीत पाए।
लोकसभा में नहीं हैं एक भी सदस्य
बसपा का मौजूदा समय में लोकसभा का एक भी सदस्य नहीं हैं। यही हाल वर्ष 2014 के चुनाव में रहा था। उस समय भी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। जबकि 2019 में 10, 2009 में 21, 2004 में 19, 1999 में 14, 1998 में पांच, 1996 में 11, 1991 तीन और 1989 में चार सीटें जीती थीं। राज्यसभा में बसपा के एक सदस्य रामजी गौतम हैं। उनका कार्यकाल नवंबर 2026 तक है। इसके बाद राज्यसभा में भी बसपा का एक भी सदस्य नहीं रहेंगे।
