लाल आतंक के खात्मे की घड़ी
दिग्विजय सिंह, कानपुर: जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के समापन, आतंकवाद का खात्मा समेत कई बड़े वादों के साथ 2014 में केंद्र की सत्ता में आई भाजपा ने उन तमाम वादों को देर सबेर पूरा किया। इसलिए भाजपा नेताओं के साथ ही आमजन में यह धारणा बनी कि मोदी है तो मुमकिन है। यह धारणा नारे में तब्दील हो गई और अब भाजपा और उसके सहयोगी दलों के मंच पर इसे पूरे जोश से बोला जाता है। अब मोदी सरकार अपने एक और वादे को पूरा करने जा रही है वह है लाल आतंक यानि नक्सल मुक्त भारत। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। नक्सलियों को डेडलाइन दी की गई थी कि वे या तो आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें अथवा मुठभेड़ में मारे जाएंगे या फिर जेल जाएंगे।
इस सख्ती का असर हुआ और तमाम बड़े हार्ड कोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में लौटना ही उचित समझा। उनके सहयोगी भी बड़े पैमाने पर हथियार डालने को मजबूर हुए। अब नक्सल मुक्त वादे के पूरा होने में सात दिन बचे हुए हैं। सुरक्षा बलों ने अपने अभियान को तेज कर दिया है। ताकि एक- एक नक्सली की गिरफ्तारी हो जाए या फिर वह हथियार डाल दे। हालांकि अभी तमाम हार्डकोर नक्सली ऐसे हैं जो सरेंडर करने को तैयार नहीं हैं और सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर छिपे हुए हैं पर सरकार की जो इच्छाशक्ति है उसे देखकर नहीं लगता कि वे सुरक्षा बलों से बच पाएंगे। भारत सीमा पर पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादियों से तो लड़ ही रहा है। देश के अंदर मौजूद उग्रवादियों, नक्सलियों के सफाए के लिए भी पूरी ताकत झोकी जा रही है।
पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से 1967 में नक्सलवाद की शुरुआत हुई थी। धीरे- धीरे यह लाल गलियारा ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में भी फैल गया। नक्सलियों ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों के जवानों, जनप्रतिनिधियों और आमजन को अपनी गोली या बारूद का शिकार बनाया। तमाम कोशिशों के बाद भी कोई सरकार उनके आतंक पर अंकुश नहीं लगा सकी, लेकिन मजबूत इच्छा शक्ति, सुरक्षा बलों को दी गई खुली छूट, मजबूत सर्विलांस सिस्टम और मुखबिर तंत्र बनाकर मोदी सरकार ने नक्सलवाद मुक्त भारत का वादा किया और 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की। उम्मीद है कि मोदी सरकार डेडलाइन खत्म होने से पहले ही लाल आतंक का खात्मा कर यह घोषणा कर देगी कि पूरा भारत अब नक्सल मुक्त हो गया है। 2019 तक देश के 9 राज्यों के 61 जिलों के 245 पुलिस थानों तक नक्सलवाद फैला हुआ था।
जनवरी 2026 तक सिर्फ दो राज्यों के 5 जिले और 11 पुलिस थाने ही नक्सल प्रभावित बचे हैं। मोदी सरकार ने सिर्फ सुरक्षा बलों के दम पर ही नहीं बल्कि विकास की गंगा बहाकर भी नक्सलियों को आत्मसपर्मण के लिए मजबूर किया है। विकास, रोजगार, शिक्षा की बयार बही तो उनकी मदद करने वाले ग्रामीण भी न सिर्फ कदम पीछे खींचने लगे बल्कि परिवार वालों पर दबाव डालकर नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए तैयार भी किया। अगर प्रभावित इलाकों में विकास की बात करें तो जनवरी 2026 तक 15 हजार किलोमीटर सड़कें बनाई गईं। मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए 9,233 टॉवर लगाए गए और युवाओं , महिलाओं को दक्ष बनाकर रोजगार दिलाने के लिए 46 आईटीआई और 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना की गई। 179 एकलव्य मॉडल स्कूल ,6,025 पोस्ट ऑफिस, विभिन्न बैंकों की 1,804 शाखाएं और और 1,321 एटीएम स्थापित किए गए। जो नक्सली आत्मसपर्मण कर रहे हैं उनके पुनर्वास के लिए भी सरकार खूब धन खर्च कर रही है।
ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि देश की जनता से जो वादा किया गया है वह निर्धारित अवधि में पूरा हो जाएगा। अब बात करें आतंकवाद की तो सुरक्षा बलों की सतर्कता, मजबूत खुफिया तंत्र की वजह से इसमें 43 फीसद की कमी आई है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की ताजा रिपोर्ट में भारत इस बार 13वें स्थान पर है, जबकि पिछले साल 11वें स्थान पर था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा लांच किए गए ऑपरेशन सिंदूर में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किए जाने और बड़े आतंकियों के मारे जाने से उनके आका डरे हुए हैं। पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के आकाओं को भी पता है कि भारत ऑपरेशन सिंदूर पार्ट टू कभी भी लांच कर सकता है। ऐसे में वे ऐसी कोई हरकत नहीं कर रहे हैं जिससे कि हमारी सेना और सरकार को कड़ा कदम उठाना पड़े। हालांकि आईएसआई भारत को अस्थिर करने की हर चाल चल रही है।
आईएसआई ने भारत में तेजी से जासूसों का जाल बिछाना शुरू किया है। सोनीपत में स्टेशन के आउटर इलाके में सोलर आधारित सीसीटीवी कैमरे लगवाने का उसका खेल पकड़ में आ गया है। एनएआई ने उसके स्लीपर सेल और जासूसों की धरपकड़ करके उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम तेज किया है। लेकिन आईएसआई ने जासूसी का ये जो नया तरीका निकाला है यह हमारी सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ईरान के सबसे बड़े धार्मिक नेता अली खामेनेई और सैन्य प्रमुखों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ऐसे ही कैमरे ईरान में लगवाए थे। इससे यह पता चलता है कि आईएसआई भी मोसाद के नक्शेकदम पर चल रही है और हमारे प्रमुख स्थलों पर कैमरे लगवाकर निगरानी करना चाहती है। हालांकि उसकी कोई भी चाल सफल नहीं होगी क्योंकि हमारा खुफिया तंत्र बहुत मजबूत है लेकिन यह उसकी यह चाल गंभीर खतरे की तरफ इशारा जरूर कर रही है।
नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं....
