अनोखी परंपरा दापा प्रथा:  बिना शादी के दांपत्य जीवन की शुरुआत

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Published By Anjali Singh
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दुनियाभर में अनेक ऐसी परंपराएं देखने को मिलती हैं, जिनके बारे में जानकर आश्चर्य होता है। भारत अपनी विविध संस्कृति और परंपराओं के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में जीवन के अपने-अपने नियम और सामाजिक व्यवस्थाएं विकसित हुई हैं। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा राजस्थान के उदयपुर, सिरोही और पाली जिलों में रहने वाली गरासिया जनजाति में देखने को मिलती है।

गरासिया समाज अपनी विशिष्ट सामाजिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस समुदाय में दांपत्य जीवन की शुरुआत एक अनोखे तरीके से होती है, जो आधुनिक समय में प्रचलित ‘लिव-इन रिलेशन’ की तरह दिखाई देती है। सामान्य भारतीय समाज में जहां विवाह को दांपत्य जीवन की अनिवार्य शर्त माना जाता है, वहीं गरासिया समाज में युवक और युवती पहले साथ रहने लगते हैं और बाद में आवश्यकता या इच्छा के अनुसार विवाह करते हैं।

इस परंपरा की शुरुआत ‘दापा प्रथा’ से होती है। जब किसी युवक और युवती के बीच आपसी सहमति बन जाती है, तो लड़के पक्ष की ओर से लड़की के परिवार को सामाजिक मान्यता के रूप में कुछ धनराशि दी जाती है। यह राशि पंचायत और समाज की सहमति से तय होती है। इसके बाद दोनों बिना औपचारिक विवाह के ही पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगते हैं। समाज भी इस संबंध को स्वीकार करता है और उन्हें परिवार के रूप में मान्यता देता है। इस व्यवस्था में एक और विशेष बात यह है कि दंपति पर तुरंत विवाह करने का कोई दबाव नहीं होता। कई बार ऐसा भी होता है कि युवक-युवती वर्षों तक साथ रहते हैं और जब उनके बच्चे हो जाते हैं या उन्हें उचित लगता है, तब वे पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह कर लेते हैं।

गरासिया समाज में इस परंपरा के पीछे एक पुरानी लोककथा भी सुनाई जाती है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले इस समाज के चार भाई अलग-अलग स्थानों पर जाकर बस गए थे। उनमें से तीन भाइयों ने विवाह किया, जबकि चौथा भाई बिना विवाह के ही अपनी साथी के साथ रहने लगा। संयोग से विवाह करने वाले तीनों भाइयों की कोई संतान नहीं हुई, जबकि चौथे भाई के वंश से ही परिवार और समाज आगे बढ़ा। इस घटना के बाद से यह मान्यता बन गई कि साथ रहकर संबंधों की सच्चाई और सामंजस्य को समझना भी जरूरी है।

हालांकि इस परंपरा में कुछ सामाजिक नियम भी हैं। यदि युवक और युवती लंबे समय तक साथ रहने के बावजूद संतान प्राप्त नहीं कर पाते, तो वे आपसी सहमति से अलग हो सकते हैं। इसके बाद दोनों किसी अन्य साथी के साथ नया संबंध बना सकते हैं और परिवार बसाने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार गरासिया समाज की यह परंपरा भारतीय समाज की विविधता को दर्शाती है, जहां हर समुदाय ने अपनी परिस्थितियों और अनुभवों के आधार पर अलग-अलग सामाजिक व्यवस्थाएं विकसित की हैं।