देशभर में ईद-उल-फितर की धूम : पीएम मोदी व सीएम योगी समेत कई नेताओं ने देशवासियों को दी ईद की बधाई, जानें क्या कहा...

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली/लखनऊ। पाक माह रमजान के तीस रोजे पूरे होने के बाद शनिवार को पूरे देश में ईद का पर्व मनाया जा रहा है। मस्जिदों में नमाज अदाएगी के बाद लोग एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद पेश कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व पूर्व सीएम व मायावती समेत कई नेताओं ने ने ईद-उल-फितर के अवसर पर देश-प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से देशवासियों को ईद-उल-फितर और नवरोज़ के विशेष अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने राष्ट्र में सुख, शांति और आपसी सद्भाव की भावना को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। ईद के पावन मौके पर देश को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा, "ईद-उल-फितर की ढेरों शुभकामनाएं। कामना है कि यह दिन चारों ओर भाईचारे और दयालुता की भावना को और आगे बढ़ाए। सभी लोग सुखी और स्वस्थ रहें। ईद मुबारक!" 

नवरोज़ पर खुशहाली की प्रार्थना

पारसी नव वर्ष 'नवरोज़' के अवसर पर भी प्रधानमंत्री ने जनता का अभिवादन किया। उन्होंने कामना की कि आने वाला वर्ष हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा लेकर आए। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "नवरोज़ के विशेष अवसर पर शुभकामनाएं। प्रार्थना करता हूँ कि यह वर्ष समृद्धि और आनंद से भरा हो। सभी स्वस्थ रहें और सभी की आकांक्षाएं पूरी हों।"

सामाजिक समरसता पर जोर

प्रधानमंत्री के ये संदेश त्योहारों के माध्यम से भारतीय समाज की विविधता और समावेशी संस्कृति को रेखांकित करते हैं। जहाँ ईद का संदेश सामाजिक एकता और करुणा पर केंद्रित रहा, वहीं नवरोज़ के संदेश में प्रगति और व्यक्तिगत लक्ष्यों की प्राप्ति की कामना की गई।

मुख्यमंत्री योगी ने ईद-उल-फितर पर दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं 

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईद-उल-फितर के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ईद-उल-फितर का पावन पर्व खुशी, मेल-मिलाप और आपसी भाईचारे का संदेश लेकर आता है। यह त्यौहार समाज में एकता और सौहार्द को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह पर्व अमन-चैन और परस्पर सद्भाव को बढ़ावा देता है। इस अवसर पर सभी लोगों को सामाजिक समरसता और भाईचारे की भावना को और सुदृढ़ करने का संकल्प लेना चाहिए।  

समतामूलक विकास को मिले रफ्तार : मायावती  

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पवित्र रमजान माह के समापन पर मनाए जाने वाले ईद उल फ़ितर के अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने खासतौर पर देश-दुनिया में रह रहे सभी मुस्लिम परिवारों को ईद की दिली मुबारकबाद देते हुए सभी भारतीयों के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की है । 

मायावती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि एक महीने तक रोजा और तरावीह जैसी इबादतों के बाद आने वाला यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। बसपा की मुखिया मायावती ने कहा कि भीम राव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मानजनक जीवन की गारंटी दी है, जिसे बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। 

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मेलजोल, भाईचारा, संयम और सहनशीलता की परंपरा को आगे बढ़ाएं, ताकि देश में समतामूलक विकास को गति मिले। उन्होंने कहा कि देश की खुशहाली और तरक्की में सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, जिससे हर व्यक्ति गर्व महसूस कर सके। 

झारखंड के राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं
 
रांची : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यवासियों को प्रकृति पर्व सरहुल और ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इन त्योहारों को प्रेम, भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक बताते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की है। 
 
गंगवार ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, प्रकृति पर्व 'सरहुल' की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। यह पावन पर्व प्रकृति के नवजीवन, उल्लास और आशा का प्रतीक है तथा हमें पर्यावरण संरक्षण और सामंजस्यपूर्ण जीवन की प्रेरणा देता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह पावन अवसर आप सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का संचार करे। वहीं उन्होंने ने लिखा, ईद-उल-फितर की दिली मुबारकबाद! यह पावन पर्व आपके जीवन में खुशियाँ एवं समृद्धि लाए तथा आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को और सुदृढ़ करे।
 
सोरेन ने लिखा, प्रकृति पर्व सरहुल के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएँ और जोहार। सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलन बनाकर ही समृद्ध और सतत भविष्य की ओर बढ़ा जा सकता है। सरहुल का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए, यही कामना करता हूं। जोहार!

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