UP: मौसम बदलते ही 4200 किमी. का सफर तय कर अपने वतन पहुंचेंगे प्रवासी पक्षी

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Published By Monis Khan
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रामपुर, अमृत विचार। मौसम का मिजाज बदलते ही 4200 किमी. का सफर तय करके प्रवासी पक्षी अपने वतन पहुंचेंगे। रामपुर में कोसी नदी के किनारे, शाहबाद में रामगंगा और मिलक के जलकुंडों पर सर्वाधिक साइबेरियन पक्षी आते हैं। जो कि जार्जिया, यूक्रेन, ईरान, कजाकिस्तान, मंगोलिया, रूस, साइबेरिया और तिब्बत समेत 30 देशों को जोड़ने वाले हवाई मार्ग से होते हुए यह पक्षी परवाज भरेंगे।

रामपुर में प्रवासी पक्षियों का आना नवंबर से फरवरी तक होता है और सर्दियों को मौसम यहां बिताकर मार्च में अपने वतन के लिए उड़ान भरते हैं। डोमिसाइल क्रेन, बार-हेडेड गूज, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रोजी पेलिकन, नार्दन शोवलर, इंडियन स्कीमर, पाइड एवोसेट, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, सिनेरियस वल्चर, हिमालयन ग्रिफन, रोज फिंच और साइबेरियन स्टोनचैट जैसी प्रजातियां अपने वतन लौट गई हैं या फिर लौटने की तैयारी में हैं। यह पक्षी सर्दियों के दौरान अपने प्रजनन और भोजन तलाश में मध्य एशिया से उड़कर आते हैं।

 प्रवासी पक्षियों की उड़ान बेहद रोचक होती है यह पक्षी वी और जे आकार की चार प्रकार की संरचनाओं में उड़ते हैं। रात में लंबी दूरी की उड़ानों के दौरान पक्षी फ्लाइट काल्स का उपयोग करते हैं। प्रवासी पक्षी सूर्य, चंद्रमा, तारों की स्थिति और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र जैसे प्राकृतिक चिह्नों का उपयोग कर अपनी यात्रा की दिशा तय करते हैं। नदियां और पर्वत श्रृंखलाएं जैसे भू-चिह्न भी उनकी यात्रा में सहायक होते हैं। कुछ प्रजातियां तो गंध के आधार पर भी दिशा निर्धारित करती हैं, जो उनकी असाधारण क्षमता है।


हर वर्ष मार्च के महीने में प्रवासी पक्षी अपने वतन लौटने लगते हैं। उनकी आमद नवंबर से फरवरी के बीच साइबेरिया और मध्य एशिया के ठंडे क्षेत्रों से कई पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा कर रामपुर पहुंचते हैं। इनमें मुख्य रूप से बत्तख प्रजातियां, बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क तथा विभिन्न प्रकार के बगुले शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर पाए जाने वाले बगुले जैसे कैटल एग्रेट और लिटिल एग्रेट पूरे वर्ष देखे जाते हैं, लेकिन सर्दियों में इनकी संख्या के साथ-साथ अन्य प्रवासी प्रजातियों की विविधता भी बढ़ जाती है। - डॉ. बेबी तबस्सुम, जूलॉजिस्ट, राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय

प्रवासी पक्षियों के रामपुर पहुंचने पर वाटर बॉडी पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी जाती है। लोगों को जागरूक किया जाता है कि कोई पक्षियों का शिकार नहीं करे। यदि कोई पक्षियों का शिकार करता है तो उसकी तत्काल सूचना वन विभाग को दें। - प्रणव कुमार जैन, डीएफओ

60- जलकुंड में तैरते प्रवासी पक्षी।
61- उड़ान भरते प्रवासी पक्षी
62- डॉ. बेबी तबस्सुम, जूलॉजिस्ट

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