अनार बना रामबाण... झिल्ली लंग्स कैंसर के इलाज में कारगर, लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध में हुआ बड़ा खुलासा, जानें क्या है खास

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Published By Muskan Dixit
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भारत में एक लाख आबादी पर 6.9 प्रतिशत लंग्स कैंसर के मरीज हैं। शोधछात्रा डॉ. प्रियंका अग्रवाल को उनके शोध पर मिला पेटेंट।

मार्कण्डेय पाण्डेय, लखनऊ, अमृत विचार: दाडिमं मधुरं स्निग्धं दीपनीयं रुचिप्रदम् आयुर्वेद में दाडिम अनार को कहा गया है। मीठा और स्निग्ध हल्का अनार वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करता है। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग में हुए शोध में अनार से फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारी की रोकथाम में सहायक होने के परिणाम सामने आए हैं। अंतिम स्टेज में पता चलने वाली लंग्स कैंसर की बीमारी में प्रयोग होने वाली दवा ''डाक्सोरूबिसिन'' की कार्यक्षमता को अनार कई गुना बढ़ा देता है। डॉ. प्रियंका अग्रवाल के इस शोध पर पेटेंट भी हासिल हो गया है।

विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग के शोध में पाया गया है कि अनार के दानों की पीले रंग की झिल्ली फेफड़े के कैंसर (लंग्स कैंसर) की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में सक्षम है। शोध के लिए पुणे के नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंसेज से फेफड़े के कैंसर की ए-549 कोशिकाएं मंगवाई गईं। अनार की झिल्ली को सुखाकर 100 प्रतिशत इथेनॉल में इसका अर्क (एब्सट्रैक्ट) तैयार किया गया। जिससे इथेनॉल में घुलने वाले सारे तत्त्व इसमें आ जाएं। शोध के दौरान जांच में सामने आया कि इस अर्क में ''5-हाइड्रोक्सीमैथिलफर्फुरल'' नामक तत्व की मात्रा सबसे अधिक (65 प्रतिशत) है, जो कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध बेहद प्रभावी है।

अनार की झिल्ली के अर्क का कमाल

कैंसर प्रभावित कोशिकाओं पर जब 35 माइक्रोग्राम प्रति एमएल की डोज दी गई, तो इसने लगभग 41 प्रतिशत कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर दिया। इसके अलावा जब इस अर्क (एब्स्ट्रैक्ट) को कैंसर की दवा ''डाक्सोरूबिसिन'' के साथ मिलाया गया, तो इसकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई।

इस तरह हुआ मिश्रण तैयार

दो तरह के मिश्रण तैयार किए गए, जिसमें पहले मिश्रण में 35 माइक्रोग्राम अर्क के साथ 1.2 माइक्रोग्राम दवा दी गई तो 65 प्रतिशत कैंसर कोशिका नष्ट हो गई। जबकि दूसरे मिश्रण में 44 माइक्रोग्राम अर्क के साथ 1.5 माइक्रोग्राम दवा देने पर 77 प्रतिशत कैंसर कोशिका खत्म हो गई।

उपचार में कोई साइड इफैक्ट नहीं

इस शोध की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह घातक मिश्रण केवल कैंसर की कोशिकाओं पर प्रहार करता है और शरीर की सामान्य कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। आमतौर पर कीमोथेरेपी के दौरान स्वस्थ कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती हैं, लेकिन अनार की झिल्ली का यह प्राकृतिक गुण इस जोखिम को कम कर सकता है।


मुख्य तत्व 5-हाइड्रोक्सीमैथिलफर्फुरल (65 प्रतिशत) दवा के साथ मिलकर 77 प्रतिशत तक कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता रखता है जो पूरी तरह सुरक्षित बिना किसी दुष्प्रभाव के युक्त है।

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