बजट सत्र के अंतिम दिनों में ‘खुला खजाना’... वित्त विभाग के निर्देश दरकिनार, अरबों के विकास कार्यों को मंजूरी
सीएम की नाराजगी के बावजूद अंतिम दिनों में तेज रहा धनावंटन
धीरेंद्र सिंह, लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बजट सत्र के अंतिम दिनों में वित्तीय अनुशासन की अनदेखी साफ नजर आई। वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभिन्न विभागों ने अंतिम समय में अरबों रुपये के विकास कार्यों और परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जताने के बावजूद धन आवंटन की रफ्तार पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
पिछले पांच कार्य दिवसों में शासन स्तर पर जारी आदेशों में वित्तीय वर्ष 2025-26 की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां ही प्रमुख रहीं। लोकनिर्माण विभाग पहले से ही अंतिम समय में बजट खर्च करने के लिए चर्चित रहा है, लेकिन इस बार नगर नियोजन, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, कारागार, संस्कृति, चिकित्सा शिक्षा, न्याय, आईटी और उद्योग समेत दर्जनों विभाग इस दौड़ में शामिल दिखे। मंगलवार को देर शाम तक ऐसे शासनादेश जारी होते रहे और लंबित प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी दी गई। इनमें सड़क निर्माण, भवन परियोजनाएं और अन्य विकास कार्य प्रमुख रहे। शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि वर्ष भर योजनाओं के समय पर तैयार न होने के कारण अंतिम दिनों में एक साथ प्रस्ताव भेजे गए, जिससे यह स्थिति बनी।
हालांकि वित्त विभाग ने पहले ही निर्देश दिए थे कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर धन आवंटन से बचा जाए, ताकि अनियोजित खर्च और गुणवत्ता में कमी न हो। बावजूद इसके, विभागों ने निर्देशों की अनदेखी करते हुए फाइलों को तेजी से निपटाया। हाल ही में समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस प्रवृत्ति पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा था कि अंतिम दिनों में अत्यधिक धन आवंटन से पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं और विभागों को पूरे वर्ष योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जल्दबाजी से परियोजनाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और भ्रष्टाचार या अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है, जिससे वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
क्या कहते हैं नियम
▪ अंतिम तिमाही में खर्च नियंत्रित रखना जरूरी
▪ आखिरी दिनों में बड़े आवंटन से बचने के निर्देश
▪ योजनाओं का क्रियान्वयन पूरे वर्ष संतुलित तरीके से हो
▪ गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना प्राथमिकता
बैंकों में होता रहा ऑडिट, कल से लेन-देन
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन मंगलवार को बैंक शाखाएं आम ग्राहकों के लिए बंद रहीं और कर्मचारी पूरे दिन वार्षिक ऑडिट कार्य में व्यस्त रहे। खातों का मिलान, बैलेंस शीट तैयार करने और लेनदेन का अंतिम सत्यापन किया गया। इस दौरान केवल आंतरिक कार्य किए गए। बैंक अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया नए वित्तीय वर्ष की सुचारु शुरुआत के लिए जरूरी है। अब बैंक 2 अप्रैल को सामान्य रूप से खुलेंगे और नियमित कामकाज शुरू होगा।
