यूपी में बदली उद्योगों की तस्वीर, पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा 10,895 फैक्ट्रियां, 16.53 लाख को रोजगार
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर ‘70 साल बनाम 9 साल’ की तस्वीर तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था का संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 17,841 नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं, जबकि आजादी के बाद 70 वर्षों में केवल 14,178 कारखाने ही पंजीकृत हो सके थे।
प्रदेश में वर्तमान में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच चुकी है। इनमें सबसे अधिक 10,895 कारखाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थापित हुए हैं, जिससे यह क्षेत्र औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन गया है।
सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति, सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस और बेहतर कानून-व्यवस्था के चलते निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
सितंबर 2023 से अब तक 10,194 कारखानों का पंजीकरण और चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखानों का जुड़ना इस रफ्तार को दर्शाता है। इन कारखानों में 16,53,179 लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें 1,23,272 महिलाएं भी शामिल हैं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत दे रही है। मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वांचल में 3,205 और बुंदेलखंड में 215 कारखाने स्थापित हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। प्रदेश में छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों का संतुलित विकास हुआ है। 14,412 छोटे, 3,213 मध्यम और 118 बड़े कारखाने प्रदेश की औद्योगिक संरचना को मजबूती दे रहे हैं।
कहां कितने कारखाने
•पश्चिमी उप्र.: 10,895
•मध्य उप्र.: 3,526
•पूर्वांचल: 3,205
•बुंदेलखंड: 215
