Moradabad: फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों की जीएसटी चोरी का खुलासा, मास्टर माइंड गिरफ्तार
मुरादाबाद, अमृत विचार। फर्जी फर्मों और जाली बिलिंग के माध्यम से करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले संगठित गिरोह का पुलिस ने बुधवार को पर्दाफाश किया। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपी मास्टर माइंड भगवान सिंह उर्फ मुर्रा प्रधान को गिरफ्तार कर लिया है, जो मथुरा जनपद के कोसीकला क्षेत्र का निवासी बताया गया है। उसने अपने नौकर के नाम से 33 फर्जी फर्म पंजीकृत कराई थी। उसका नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और बिहार तक फैला है। वह जीएसटी चोरी के मामले में आजमगढ़ में भी लिखे गए मुकदमें में वांछित चल रहा था।
बुधवार को एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने जीएसटी चोरी के पकड़े गए मास्टरमाइंड भगवान सिंह निवासी कोसीकला जनपद मथुरा और उसके नौकर रविंद्र के बारे में जानकारी दी। बताया कि दोनों आरोपी लंबे समय से विभिन्न राज्यों में फर्जी फर्में बनाकर जाली बिल्टियों और ई-वे बिल के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कर रहे थे। जिन्हें पुलिस ने 20 दिन की मशक्कत के बाद पकड़ा है। यह कार्रवाई राज्य कर विभाग की शिकायत के आधार पर की गई है। एसपी क्राइम ने बताया कि सहायक आयुक्त, राज्य कर चतुर्थ इकाई की तहरीर पर थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी, जिसे बाद में साइबर क्राइम टीम को सौंपा गया।
जीएसटी टैक्स का चोरी के मास्टरमाइंड ने अपने नौकर रविंद्र के नाम पर इन फर्मों के माध्यम से बिना वास्तविक माल ढुलाई के कागजी लेनदेन दिखाकर जीएसटी चोरी की है। एसपी क्राइम ने बताया कि यह कार्रवाई संगठित रूप से की जा रही टैक्स चोरी के बड़े नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण है। जांच आगे बढ़ने पर और भी लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया है। इन उपकरणों में फर्जी बिलिंग, जीएसटी दस्तावेज और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी और उसके नेटवर्क के खिलाफ विभिन्न जनपदों में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आर्थिक अपराध शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
नामी कंपनी के नामों का भी करता था प्रयोग
पुलिस को जांच के दौरान मांझी इंटरप्राइजेज और श्री बाबा ट्रेडर्स जैसी फर्मों के नाम भी मिले हैं, जिनका उपयोग फर्जी बिलिंग और दस्तावेज तैयार करने में किया जा रहा था। कई मामलों में एक ही वाहन और बिल्टी नंबर का अलग-अलग लेनदेन में इस्तेमाल किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
2024 से कर रहा था फर्जी बिलिंग नेटवर्क का प्रयोग
आरोपी वर्ष 2024 से स्क्रैप और अन्य व्यापारिक गतिविधियों के नाम पर फर्जी बिलिंग का नेटवर्क चला रहा था। उसने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों में व्यापारियों के नाम और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 33 फर्जी फर्में खड़ी कर ली थीं।
