संपादकीय : ट्रंप के दावों का अर्थ
डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा कि तीन सप्ताह के भीतर युद्ध खत्म हो सकता है, जितना आकर्षक लगता है, उतना ही जटिल और संदिग्ध भी है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में युद्ध केवल एक देश की इच्छा से समाप्त नहीं होते, बल्कि अनेक पक्षों, हितों और वास्तविकताओं के संतुलन से नियंत्रित होते हैं। ट्रंप अमेरिका के लिए युद्ध समाप्ति की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन वे न तो इजराइल और न ही ईरान को युद्ध विराम के लिए बाध्य कर सकते हैं। इजराइल और ईरान दोनों अपने-अपने रणनीतिक हितों के अनुसार निर्णय लेते हैं। ऐसे में तीन सप्ताह में संपूर्ण युद्ध समाप्त होने का दावा व्यावहारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक शिगूफा है। ट्रंप का यह कहना कि अमेरिका अपने “लक्ष्य हासिल कर चुका है”, कई सवाल खड़े करता है। यदि लक्ष्य केवल ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना था, तो सीमित अर्थों में यह दावा स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन यदि लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन था, तो यह दावा वास्तविकता से दूर है। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था अभी भी कायम है और वहां किसी स्पष्ट सत्ता परिवर्तन के संकेत नहीं हैं। इसी प्रकार, ट्रंप का यह दावा कि ईरान युद्ध विराम चाहता है, तब और कमजोर पड़ जाता है, जब स्वयं ईरान इस बात से इनकार करता है।
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में इस तरह के विरोधाभासी बयान अक्सर “नेरेटिव निर्माण” का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू और वैश्विक जनमत को प्रभावित करना होता है। ट्रंप के युद्ध समाप्ति के प्रति उत्साह के पीछे घरेलू राजनीतिक दबावों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमेरिका में बढ़ती महंगाई, रक्षा खर्च का बोझ और आगामी चुनावी चुनौतियां, उन्हें एक “निर्णायक नेता” की छवि प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करती हैं। इतिहास गवाह है कि ट्रंप कई बार बड़े दावे करते रहे हैं और बाद में उनसे पीछे भी हटते रहे हैं। यह उनकी राजनीतिक शैली का हिस्सा भी है और कभी-कभी परिस्थितिजन्य मजबूरी भी। ट्रंप का यह कहना कि “होर्मुज जलडमरूमध्य से मेरा लेना-देना नहीं” वस्तुतः आंशिक सत्य है। अमेरिका पर इसका प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर पूरी दुनिया प्रभावित होती है। चूंकि यह संकट उसी संघर्ष से जुड़ा है, जिसमें अमेरिका की भूमिका रही है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का यह अपेक्षा करना स्वाभाविक है कि अमेरिका समाधान में सक्रिय भूमिका निभाए।
ट्रंप का तीन सप्ताह में युद्ध समाप्त करने का दावा सुनिश्चित कूटनीतिक वास्तविकता नहीं होने से ऐसा संभव नहीं दिखता, पर मान लिया जाए कि तीन सप्ताह में युद्ध समाप्त हो जाता है, तो इसका भारत और विश्व पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी, आपूर्ति श्रृंखला सुधरेगी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता कम होगी। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए यह राहत अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। परंतु भारत को ट्रंप के बयानों को सतर्कता और यथार्थवाद के साथ लेना चाहिए। कूटनीति में घोषणाओं से अधिक महत्व परिस्थितियों और ठोस कदमों का होता है। भारत की नीति स्पष्ट होनी चाहिए- भावनाएं पीछे, पहले रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा सुरक्षा और अपने नागरिकों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा के विवेक सम्मत निर्णय।
