मिशन 2027 की तैयारियों में जुटी मायावतीः 14 अप्रैल को करेंगी महा शक्ति प्रदर्शन, अंबेडकर जयंती पर लखनऊ में जुटेगी भारी भीड़
लखनऊः उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी कवायद शुरू कर दी है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती लगातार संगठन की बैठकें ले रही हैं। बसपा के पदाधिकारियों की मानें तो मायावती के निर्देश पर 14 अप्रैल को राजधानी लखनऊ में बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है। पार्टी अभी से इसकी तैयारी में जुट गई है। पार्टी के एक पूर्व सांसद ने कहा कि पार्टी 14 अप्रैल को भीम राव अंबेडकर की जयंती पर बड़े आयोजन की तैयारी में जुटी है। यह रैली अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी। यह विरोधी पार्टियों के लिए एक बड़ा संदेश होगा।
इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता डॉक्टर भीम राव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। बसपा के नेता ने बताया कि हाल ही में लखनऊ में आयोजित पार्टी की बैठक में मायावती ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को लखनऊ स्थित अंबेडकर स्मारक पर एकत्र होने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ता भी लखनऊ में ही जुटेंगे, क्योंकि दलित प्रेरणा स्थल फिलहाल नवीनीकरण कार्य चल रहा है। ऐसे में इस बार रिकॉर्ड भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अपने परिवार के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हों, जिससे आयोजन को और व्यापक बनाया जा सके। इससे पहले 9 अक्टूबर 2025 को बसपा ने अपने संस्थापक कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि पर भी लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें पूरे प्रदेश से कार्यकर्ता जुटे थे। इस कार्यक्रम को 2016 के बाद बसपा का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना गया था, जहां मायावती ने एक दशक बाद कांशीराम स्मारक पर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था।
इधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 14 अप्रैल का यह आयोजन 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बसपा के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत साबित हो सकता है। हालांकि, इस कार्यक्रम में मायावती की मौजूदगी को लेकर पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बसपा के सूत्रों की मानें तो पार्टी पदाधिकारी इस आयोजन को भव्य बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि आगामी विधानसभा चुनाव में अब लगभग एक वर्ष का समय शेष है और प्रदेश के अन्य दल भी अंबेडकर की विरासत को लेकर सक्रिय हैं।
दरअसल, बसपा खुद को 'बहुजन' विचारधारा की सबसे मजबूत वाहक और अंबेडकर की सच्ची अनुयायी बताती रही है। पार्टी का दावा है कि उसका नेतृत्व बहुजन समाज का प्रतिनिधित्व करता है। गौरतलब है कि कांशीराम ने बामसेफ और डीएस 4 जैसे संगठनों के माध्यम से दलित और पिछड़े वर्गों की आवाज को मजबूत किया था, जिसके बाद बसपा का गठन हुआ। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीतिक शास्त्र के प्रोफेसर रह चुके ए के सिंह कहते हैं, " मायावती के लिए 2027 का चुनाव काफ़ी महत्वपूर्ण होने वाला है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहा है। लगातार खराब प्रदर्शन की वजह से कार्यकर्तावों का मनोबल गिर रहा है। यही स्थिति रही तो उनका कोर वोटर दूसरी पार्टी में धीरे धीरे शिफ़्ट हो जाएगा। जिससे पार्टी को बड़ा नुक़सान उठाना पड़ेगा।"
कुमार ने कहा कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को केवल एक सीट रसड़ा (बलिया) पर जीत मिली थी और पार्टी का वोट शेयर 12.8 प्रतिशत रहा था। इसके बाद 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन काफ़ी निराशाजनक रहा था। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। यही नहीं मायावती के नेतृत्व में पार्टी ने उत्तर प्रदेश और देश भर में सभी सीटों पर हार का सामना किया, जो इसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि पार्टी का वोट शेयर भी 10% से अधिक घटकर लगभग 9.24% रह गया था जो पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं । ऐसे में आगामी अंबेडकर जयंती का यह आयोजन पार्टी के लिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
