उत्तराखंड में बारिश का कहर: भूस्खलन के चलते केदारनाथ यात्रा पर लगी रोक, बद्रीनाथ हाईवे पर भी भीषण जाम
केदारनाथः उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से मौसम के बदले मिजाज ने चारधाम यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही भारी बारिश और जगह-जगह भूस्खलन (Landslide) के कारण प्रशासन को केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का बड़ा फैसला लेना पड़ा है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसके बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
बारिश और मलबे के कारण पहाड़ी रास्तों पर सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं और कई जगहों पर भीषण जाम की स्थिति पैदा हो गई है।
रुद्रप्रयाग प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी, यात्रा पर लगाई रोक
रुद्रप्रयाग पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए केदारनाथ धाम की यात्रा को फिलहाल होल्ड पर रख दिया है। पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि "जनपद रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु केदारनाथ यात्रा को अस्थायी तौर पर रोका गया है। सभी यात्रियों से अपील है कि वे जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें और मौसम साफ होने का इंतजार करें।"
https://twitter.com/RudraprayagPol/status/2060951161650446717?s=20
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी
प्रशासन ने संकट में फंसे तीर्थयात्रियों की मदद के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। किसी भी असुविधा या आपातकालीन स्थिति में श्रद्धालु इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
मोबाइल नंबर: 8958757335, 8218326386
आपातकालीन सेवा: 112 (डायल 112 के माध्यम से भी तुरंत मदद ली जा सकती है)
बद्रीनाथ मार्ग पर थमे वाहनों के पहिए, 'टोकन सिस्टम' से खुल रहा जाम
दूसरी ओर, बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7) पर जोशीमठ के पास स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। भारी भीड़ और खराब रास्तों के कारण वाहनों की आवाजाही लगभग ठप है।
जाम से निपटने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा फॉर्मूला निकाला है। हाईवे पर 30-30 मिनट के अंतराल पर एकतरफा (One-Way) ट्रैफिक को छोड़ने के लिए 'आपातकालीन टोकन-आधारित गेट प्रणाली' (Token-Based Gate System) को सक्रिय किया गया है।
खस्ताहाल सड़कें और रिकॉर्ड भीड़ बनी बड़ी चुनौती
चमोली के पुलिस अधीक्षक (SP) सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, इस समय बुनियादी ढांचे पर क्षमता से अधिक दबाव है। प्रतिदिन लगभग 30,000 से 35,000 तीर्थयात्री बद्रीनाथ धाम और 5,000 से 10,000 श्रद्धालु हेमकुंड साहिब की यात्रा कर रहे हैं। जोशीमठ-मारवाड़ी-विष्णुप्रयाग मार्ग के बीच करीब 10 किलोमीटर का हिस्सा बेहद जर्जर स्थिति में है। कुछ साल पहले जोशीमठ में हुए भू-धंसाव (Land Subsidence) के कारण यहां का सड़क ढांचा पहले ही कमजोर हो चुका है।
एसपी ने बताया कि जोशीमठ में नरसिंह मंदिर के पास जो गेट सिस्टम बनाया गया है, वह जमीनी स्तर पर कारगर साबित हो रहा है। इसके जरिए जब तक श्रद्धालु अपनी गाड़ी की बारी का इंतजार करते हैं, तब तक वे आसानी से नरसिंह मंदिर के दर्शन भी कर पा रहे हैं।
