मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज : पद से हटाने के लिए जानिये कितने सांसदों ने किया था साइन 

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नई दिल्ली :  राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के महाअभियोग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। राज्यसभा सचिवालय ने सोमवार देर शाम एक बुलेटिन जारी कर बताया कि सभापति ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के अंतर्गत उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उक्त प्रस्ताव की सूचना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। 

यह प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस की ओर से 12 मार्च को दिया गया था और इस पर विपक्ष के 63 सदस्यों ने हस्ताक्षर किये थे। राज्यसभा के बुलेटिन में कहा गया है कि प्रस्ताव की सूचना पर विधिवत विचार करने तथा संबंधित सभी पहलुओं और मुद्दों का सावधानीपूर्वक एवं निष्पक्ष मूल्यांकन करने के पश्चात सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के अंतर्गत उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उक्त प्रस्ताव की सूचना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

इस प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर भेदभावपूर्ण आचरण करने का आरोप लगाया गया है। यह भी दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पक्षपात करते हुए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया है। लोकसभा में भी उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव दिया गया था जिस पर विपक्ष के 130 सदस्यों ने हस्ताक्षर किये थे। विपक्ष मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर लंबे समय से श्री कुमार के खिलाफ अभियान चला रहा है। इससे पहले विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी उनके पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ प्रस्ताव लाया था जो सदन में गिर गया था।

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