Bareilly: पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने के चार आरोपी बरी

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Published By Monis Khan
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विधि संवाददाता, बरेली। पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने के मामले में विवेचना में खामियों के आधार पर संदेह का लाभ प्रदान करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश उमा शंकर कहार ने थाना शेरगढ़ सिमरावा निवासी वली खां, कौशर खां, जाहिद खां व अकबर खां समेत 4 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

मामले की रिपोर्ट एसआई हरपत सिंह ने थाना भोजीपुरा में रिपोर्ट लिखाई थी। कहा था कि 18 दिसम्बर 2018 को रिठौरा रोड नहर के पास पहुंचे तो सड़की बायीं ओर दो बाइक दिखायी दी चार व्यक्ति खड़े थे। शक होने पर टोका तो चिल्ला पड़े, पुलिस है, मार दो। तभी बदमाशों ने जान से मारने की नियत से हम लोगो पर गोली चला दी। जिससे हम सभी लोग बाल बाल बच गये। चारों बदमाशों को पकड़ लिया। पूछताछ में बताया कि हम लोग चोरी करते है पचदौरा के ट्रांसफार्मर से तेल चोरी किया है नौ हजार रुपये में बेंच दिया। रेलवे समेत कई जगहों पर वारदात की हैं। पुलिस ने हत्या के प्रयास, आयुध अधिनियम, चोरी समेत गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोप पत्र कोर्ट भेजा था।

कोर्ट ने निर्णय में खोली पुलिस विवेचना में लापरवाही की पोल
अदालत ने अपने आदेश में एडवर्सरियल प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि फौजदारी परीक्षण में किसी तथ्य को साबित करना उपधारणा एवं परिकल्पनाओं के दायरे में नहीं आता है। संदेह हमेशा तर्कसंगत व्यक्ति का होना चाहिए। संदेह वास्तविक एवं ठोस तथा साक्ष्य की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति के आधार पर होना चाहिए न कि मात्र संभावनाओं के आधार पर। कोर्ट ने ट्रायल में पाया कि हत्या के प्रयास का मुख्य आधार यह है कि पुलिस बल पर जान से मारने की नियत से फायर किया गया, जबकि पुलिस बल के किसी सदस्य को कोई चोट नहीं आयी थी।

पुलिसकर्मी किस प्रकार या किस वस्तु की आड़ लेकर फायर से बचे, इस बाबत केवल एफआईआर में उल्लेख है कि बाल-बाल बच गये। यह तथ्य संदेह पैदा करता है। जिस 12 बोर तमंचे से फायर करना बताया, उसको विधि विज्ञान प्रयोगशाला भी फॉरेंसिक टेस्ट के लिए नहीं भेजा गया। केवल पुलिस के यह कह देने से कि मुल्जिमों ने पुलिस पार्टी पर फायर किया, तथ्य को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

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