World Health Day: गर्भावस्था में लापरवाही पड़ सकती है भारी, डॉक्टर की सलाह ही सुरक्षित मातृत्व की कुंजी

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Published By Muskan Dixit
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''विज्ञान पर भरोसा'' और समय पर देखभाल से ही मां और शिशु का भविष्य सुरक्षित

पंकज द्विवेदी, लखनऊ, अमृत विचार : गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज करना मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर जोखिम खड़ा कर सकता है। 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षित मातृत्व के लिए चिकित्सा सलाह, नियमित जांच और परिवार का सहयोग बेहद जरूरी है। इस वर्ष की थीम ‘टुगेदर फॉर हेल्थ: स्टैंड विद साइंस’ भी यही संदेश देती है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए विज्ञान और विशेषज्ञों पर भरोसा करना आवश्यक है।

लापरवाही से बढ़ा जोखिम, झेलनी पड़ी परेशानियां

लखनऊ की 35 वर्षीय शिक्षिका सोनी का मामला इसका उदाहरण है। चिकित्सकों ने उनकी गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाला बताते हुए पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने इसे अनदेखा किया। परिणामस्वरूप तीसरे माह में रक्तस्राव शुरू हो गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। बाद के छह माह उन्हें पूरी तरह बिस्तर पर रहना पड़ा। हालांकि परिवार के सहयोग से उन्होंने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, लेकिन पूरी गर्भावस्था कष्टदायक रही। इसी तरह 31 वर्षीय गृहिणी रानी ने भी चिकित्सकीय सलाह को गंभीरता से नहीं लिया। सातवें माह में ही उनकी बच्ची का जन्म हो गया और उसे एक माह तक आईसीयू में रहना पड़ा। अब बच्ची स्वस्थ है, लेकिन यह समय परिवार के लिए बेहद कठिन साबित हुआ।

समझदारी और निगरानी से मिला सुखद परिणाम

वहीं 31 वर्षीय कीर्ति का अनुभव एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। विवाह के दस वर्ष बाद गर्भधारण करने वाली कीर्ति को पहले दो बार गर्भपात कराना पड़ा क्योंकि भ्रूण का विकास सही नहीं हो रहा था। तीसरी बार उन्होंने चिकित्सकों की निगरानी में पूरी सावधानी बरती और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

विशेषज्ञों की सलाह

केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव के अनुसार, चाहे गर्भावस्था सामान्य हो या उच्च जोखिम वाली, डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। बेड रेस्ट, दवाएं और नियमित जांच हर सलाह के पीछे वैज्ञानिक कारण होते हैं, जिनका पालन जरूरी है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि गर्भावस्था के दौरान जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम के अनुरूप, यदि हम विज्ञान पर भरोसा करें और सही चिकित्सा सलाह का पालन करें, तो मां और शिशु दोनों का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

ऐसे समझे उच्च जोखिम गर्भावस्था

•पूर्व में मृत शिशु का जन्म व नवजात शिशु की मृत्यु

•पूर्व में प्री टर्म बच्चे का जन्म

•पूर्व में बार-बार गर्भपात होना

•पूर्व में कम वजन का शिशु पैदा होना

•एक्लेम्पशिया की हिस्ट्री या प्री एक्लेम्पशिया

•पूर्व में सिजेरियन होना

•पूर्व में भ्रूण में जन्मजात विकृत की हिस्ट्री

•पूर्व प्रसव में पीपीएच की हिस्ट्री

•गंभीर बीमारी से ग्रसित होना

•आयु 15 वर्ष से कम या 35 वर्ष से ज्यादा

•मां का वजन 35 किलो से कम

•लंबाई 145 सेमी से कम

•गर्भाशय या योनि में असामान्यता होना

गर्भावस्था में इन बातों का रखा ध्यान

•कम से कम चार प्रसवपूर्व जांचे कराएं

•चिकित्सक की सलाह माने और सलाह के अनुसार दवाएं लें

•बेड रेस्ट की सलाह को अनदेखा न करें

•संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करें

•कोई भी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं

 

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