Bareilly: जेल में याराना बाहर जुर्म...मौत के बाद सामने आए सबके बुरे कर्म

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। बड़ा बाईपास पर भीषण हादसे में मारे गए अपराधी मनमोहन व सिकंदर की दोस्ती बरेली जेल में हुई थी। गुनाह का रिश्ता बना और बाहर आकर बड़ा कांड कर डाला। जैसा मनमोहन था, वैसा उसका पिता नत्थू सिंह था। सबने मिलकर गुरुग्राम के ऑटो ड्राइवर मनोज व उसके फूल से दो बच्चों अपहरण का ताना-बाना बुना था। रामपुर से दो अपराधी विशेष और प्रिंस यादव भाड़े पर साथ किए थे।प्लानिंग मनोज की हत्या कर बच्चों को छोड़े जाने के बदले फिरौती वसूलने की थी, मगर कुदरत ने बुरे का बुरा कर दिया। रोड एक्सीडेंट में 3 किडनैपर मारे गए। एक अस्पताल में मौत से लड़ रहा है और बाकी बचे एक से पुलिस बाकी के राज खुलवाने में लगी है।

पुलिस के अनुसार, बरेली-दिल्ली हाईवे पर परधौली गांव के पास एक्सीडेंट में जान गंवाने वाले मनमोहन, सिकंदर और विशेष यादव का अपराधिक इतिहास मिला है। सिंकदर पीलीभीत के जहानाबाद थाने का जिला बदर अपराधी। मनमोहन और उसका पिता नत्थू सिंह हत्या के मामले में जेल काट चुके थे। फरीदपुर थाने में 2022 में दोनों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। नत्थू पर एक केस और लिखा गया था। सिकंदर भी पेशेवर अपराधी था। उसके खिलाफ बरेली के शाही थाने में आर्म्स एक्ट, पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी में गैंगस्टर और आर्म्स एक्ट समेत तीन मुकदमे दर्ज हैं। विशेष यादव के खिलाफ रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दो मुकदम दर्ज है। प्रिंस यादव के खिलाफ पीलीभीत थाने में केस मिले हैं। हादसे में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती प्रिंस से पुलिस ने पूछताछ की तो पूरी टोली का गुनाहों से परदा उठ गया। पुलिस ने इसके बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए मनमोहन के पिता नत्थू सिंह को गिरफ्तार उसके घर में कैद ऑटो ड्राइवर मनोज को मुक्त करा लिया। शातिर नत्थू भी पुलिस के सवालों के आगे ज्यादा नहीं टिक सका और तोते की तरह पूरा गुनाहनामा सामने रख दिया। प्रिंस को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

बेबस पूजा को आतंकित करते रहे अपराधी
बरेली। पति और दो मासूम बेटों के अपहरण से गुरुग्राम में रह रही पूजा बहुत परेशान थी। उसने पुलिस में केस दर्ज करा रखा था मगर कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। पुलिस के जरिए अचानक बरेली में बच्चों के घायल होने और पति के बरामद होने की सूचना मिलती तो वह एनसीआर से बरेली दौड़ी चली आई। अस्पताल में बच्चों को देखा तो कलेज से भीच लिया। कभी पति से लिपटकर रोती तो कभी बच्चों के सिर पर हाथ फेरते हुए आंसू बहाती। पुलिस का कहना है कि मनोज-पूजा के दोनों बेटों की हालत में सुधार है। हरियाणा पुलिस भी बरेली पहुंचकर कार्रवाई में जुट गई है। पूजा ने पुलिस को बताया कि गायब होने के बाद उसने पति के नंबर पर लगातार कॉल की थीं, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। काफी देर बाद कॉल आई। अपहरण करने वालों पहले खुद को पुलिस बताकर धमकाया। कहा कि मनोज गलत साइड गाड़ी चला रहा था, इसलिए हिरासत में लिया है। फिर कॉल काट दी गई। दोबारा कॉल करने पर कहा कि उससे कहा गया कि पुलिस को कुछ भी बताया तो पति-बच्चे सबको मार देंगे। पति व बेटों से बात उसकी बात भी कराई। वह रोती रही मगर पति से फिर बात नहीं करने दी।

कार हादसे ने बचा ली बंधक मनोज की जान
पुलिस की जांच में यह बात साफ हो गई है कि अपराधी ग्रुप का इरादा अपहरण के बाद ऑटो चालक मनोज की हत्या और उसके दो बेटों की रिहाई के बदले फिरौती वसूलने का था। मनमोहन का पिता नत्थूलाल मनोज की करीबी सम्बंधी युवती के साथ रिलेशनशिप में था। मनमोहन ने मनोज की नाबालिग भांजी को प्यार के जाल में फंसा लिया था और शादी करने वाला था। बिरादरी अलग होने की वजह से मनोज रिश्ते के खिलाफ था। मनोज ने अपनी भांजी को गोद लेकर बेटी की तरह पाला था। मनमोहन का चाल-चलन खराब होने से वह परेशान था। उसे राह का कांटा मनाकर मनमोहन ने साथियों के साथ उसकी हत्या की साजिश रची थी मगर हादसे ने पूरा खेल पलट दिया और मनोज की जान बच गई। उसके बच्चे भी घायल होकर पुलिस के हाथ लग गए।

ऑटो में सवार बनकर बैठे, रैकी के बाद वारदात

बरेली। नाबालिग भांजी से शादी में मनोज बाधा बना रहा था, इसलिए मनोज ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी। अपहरण से पहले चार दिन उसकी रैकी कराई थी। कई दिन सवारी बनकर मनोज के ऑटो में सफर किया। शनिवार को मनोज और और उसके दो बच्चों का अपहरण कर बरेली लाया गया था। मनोज-पूजा भी मनमोहन के गांव टांडा सिकंदरपुर के रहने वाले हैं। जेल से छूटने के बाद मनमोहन व उसका पिता नत्थू हरियाणा में रहने पहुंचे थे। वहां मनोज ने ही मनमोहन की वाटर प्लांट पर नौकरी लगवाई थी। उसे पता नहीं था, मनमोहन व उसका पिता नत्थू उसकी दुनिया लूटने का षडयंत्र रच डालेंगे। प्रिंस ने पुलिस को बताया है कि मनमोहन ने पूरा काम होने के बाद पैसे देने को कहा था। उसे 20 हजार रुपये दे भी दिए गए थे।

बच्चों को डिग्गी में पटका, पिता पर ताना तमंचा

गुरुग्राम से अपहरण के बाद अपराधियों ने मनोज कार में बीच की सीट पर बिठाया था और तमंचा तानकर मुंह बंद रखने की धमकी दी थी। उसके दोनों बेटों को डिग्गी में डाल दिया गया था। जैसे ही कोई टोल आता तो मनोज को गोली मारने की धमकी देकर शीशे बंद कर देते थे। वैसे सवाल ये भी है कि गुरुग्राम बरेली तक दर्जनों थाने और चौकी-चैक पोस्ट हैं, लेकिन कहीं भी पुलिस ने कार को संदिग्ध मानकर चैक नहीं किया।

मनमोहन ने मनोज के साथ दोस्ती में किया घात
बरेली। मनोज की पत्नी पूजा ने गुरुग्राम के डीएलएफ फेस-1 थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि वह नाथूपुर गांव के पास एस 51 में परिवार के साथ रहती है। पति कई दिन से एक सवारी को हनुमान मंदिर सिकंदरपुर पहाड़ी के पास रोजाना दर्शन के लिए ले जा रहे थे। 4 अप्रैल की शाम को भी पति ऑटो से सवारी को मंदिर ले गए लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे। ऑटो वहीं खड़ा था लेकिन मनोज व बच्चे गायब थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी उसका अपहरण करने के लिए कई दिन से रेकी कर रहे थे। अपहरण के बाद आरोपी हादसे वाली कार से ही पिता और पुत्रों को बरेली ला गया था। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मनोज की छोटी बहन का पति शराब पीकर मारपीट करता था। मनोज ने इसी वजह से भांजी को अपने पास बुला लिया था। मनमोहन का मनोज से पुराना मिलना था। वह जेल से छूटने के बाद नौकरी की तलाश में उसके पास गया था। दोस्ती में घात करते हुए उसने मनोज की भांजी को अपने जाल में फंसा लिया। मनोज ने विरोध शुरू किया तो मनमोहन उसके खून का प्यासा हो गया। हालांकि, हादसे ने '' कुदरत का न्याय'' और बुरे का बुरा'' वाली कहानी पर फिर अपनी मुहर लगा दी है।

 

 

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