Moradabad:निजी स्कूलों में ‘कमीशन’ का खेल...बिक रहीं महंगी किताबें
मुरादाबाद, अमृत विचार। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की किताबों को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। फीस के साथ-साथ महंगी पुस्तकें भी बजट पर भारी पड़ रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश होने के बावजूद कई स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों को हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
शहर के एक निजी स्कूल की कक्षा पांच की बुक लिस्ट में 16 किताबें शामिल हैं। इनकी कुल कीमत करीब 5938 रुपये है। इसके अलावा नोटबुक और स्टेशनरी जोड़ने पर खर्च 7581 रुपये तक पहुंच जाता है। सूची में वर्कबुक, प्रैक्टिस बुक और अलग-अलग विषयों की अतिरिक्त किताबें भी शामिल हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग इस मामले में सख्ती करे और निजी प्रकाशकों के कमीशन पर रोक लगाए।
वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि अभिभावकों की ओर से शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। इसके अलावा स्कूलवार किताबों की लिस्ट मंगाई गई है। स्कूल संचालक नियम विरुद्ध किताबें न लगाएं इसकी निगरानी की जाएगी।
एनसीईआरटी बनाम निजी किताबें
कक्षा पांच की सभी एनसीईआरटी किताबें लगभग 800 से 900 रुपये में उपलब्ध हो जाती हैं। इसके मुकाबले निजी प्रकाशकों की किताबों पर सात हजार रुपये से अधिक खर्च कराया जा रहा है। यानी अभिभावकों पर छह-सात हजार रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
नियमों की अनदेखी
सरकारी निर्देशों के अनुसार स्कूलों को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से पढ़ाई करानी चाहिए और अतिरिक्त किताबें अनिवार्य नहीं की जा सकतीं। इसके बावजूद कई स्कूल 10 में से सिर्फ दो-तीन किताबें एनसीईआरटी की लगाकर बाकी सभी निजी प्रकाशकों की रख रहे हैं।
अभिभावकों की मजबूरी
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल द्वारा दी गई सूची के अनुसार ही किताबें खरीदनी पड़ती हैं। खास बात यह है कि अधिकांश निजी स्कूलों की किताबें चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। ऐसे उन्हें महंगे दामों पर ही किताब खरीदनी पड़ रही हैं। बाजार में एनसीईआरटी किताबों की कमी भी परेशानी बढ़ा रही है।
