Bareilly: शहर के वैज्ञानिक से लेकर डॉक्टर तक हुए साइबर फ्रॉड शिकार

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। साइबर अपराधियों का जंजाल ऐसा है कि बरेली में कई आम लोग ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक-डिजिटल फ्रॉड का शिकार बन चुके हैं। कई मामलों में पुलिस की सक्रियता लोग लुटने से बच भी चुके हैं।

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) परिसर में रह रहे सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 1.29 करोड़ रुपये ठग लिए। पीड़ित ने सप्ताहभर तक किसी से इसका जिक्र तक नहीं किया। एक सप्ताह बाद उन्होने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पश्चिम बंगाल के हुगली के मूल निवासी वैज्ञानिक आईवीआरआई में तैनात रहे।

वह जनवरी 2025 में सेवानिवृत्त हुए थे। 17 जून 2025 को उनके पास व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने खुद को बंगलूरू सिटी पुलिस का अधिकारी बताकर उनके आधार कार्ड से सिम निकालकर नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी व मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध लगाकर ठगी की थी। 

इस मामले में लखनऊ एसटीएफ की मदद से पुलिस ने लखनऊ के रहने सुधीर कुमार चौरसिया, श्याम कुमार वर्मा, महेंद्र प्रताप सिंह और गोंडा निवासी रजनीश द्विवेदी को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अगस्त 2025 में प्रेमनगर थाना क्षेत्र के एकता नगर निवासी बैंक ऑफ बड़ौदा की सेवानिवृत्त मैनेजर गुलशन कुमारी को 55 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके 70 लाख रुपये की मांग की गई थी। पुलिस ने सूचना मिलने के बाद उन्हे मुक्त कराया था। 

इसके अलावा जनवरी 2025 में मुंबई के हवाला कारोबार में आधार कार्ड का इस्तेमाल होने की धमकी देकर साइबर ठगों ने बारादरी क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर नजबुल हसन को डिजिटल अरेस्ट कर लिया। ठग के कहने पर डाक्टर ने 72 घंटे के लिए होटल में लिया कमरा लिया था। शक होने पर परिवार की सजगता से सात घंटे में मुक्त पुलिस की मदद से उन्हे मुक्त कराया गया था। इसके अलावा अन्य मामलों में भी लोग साइबर ठगों की बातों में आकर डिटिटल अरेस्ट होने के बाद रकम गंवा चुके है।

यह भी ध्यान रहे
-कभी भी किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक न करें।
-ऑनलाइन नौकरी का सत्यापन जरूर करें।

-पैसा दोगुना करने के लालच में बिलकुल न फंसे।
-निवेश सिर्फ उन्हीं में करें जिस कंपनी को जानते हो।

-ठगी होते ही 1930 पर साइबर पुलिस को सूचना दें।
-अनजान नंबरों से कॉल-मैसेज पर भरोसा न करें।

रहे सावधान

-डिजिटल अरेस्ट बता कर डराते हैं ठग।
-जानी-मानी कंपनियों के नाम पर मेल।

-फर्जी लिंक्स-मैसेज भेजकर ठगी ।
-गलती से पैसे भेजने भी साजिश।

-इमोशनल मैनिपुलेशन स्कैम।
--बिना डॉक्युमेंट लोन का झांसा।

-केवाईसी के नाम पर ठगी।
-सोशल मीडिया पर बदनामी का डर।

 

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