लेबनान पर इजराइली हमलों का जवाब: ईरान ने बंद किया होर्मुज, खतरे में पड़ा वैश्विक व्यापार और युद्धविराम

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Published By Anjali Singh
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तेहरान। ईरान ने इजराइल द्वारा लेबनान में हमले तेज किए जाने के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर बंद कर दिया, जिससे हाल में हुआ युद्धविराम खतरे में पड़ गया है। अमेरिका ने जलडमरूमध्य को तत्काल खोलने की मांग की है और शांति वार्ता को पटरी पर बनाए रखने की कोशिश की है। अमेरिका और ईरान दोनों ने समझौते को अपनी-अपनी जीत बताया है, वहीं क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमले जारी हैं। 

इस बीच इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। बेरूत में व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों पर हमले किए गए। इन हमलों में बुधवार को कम से कम 182 लोगों की मौत हुई। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि प्रस्तावित वार्ता "अतार्किक" है क्योंकि अमेरिका ने युद्ध विराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि लेबनान में संघर्ष खत्म करना युद्धविराम का हिस्सा था, जबकि इजराइल और अमेरिका ने इससे इनकार किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जलडमरूमध्य बंद करने को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और इसे फिर खोलने की मांग दोहराई। 

समझौते की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकता है, जबकि अमेरिका इसका विरोध कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और मतभेदों के चलते युद्धविराम के कायम रहने पर अनिश्चितता बनी हुई है।

लेबनान में इजरायली हमले रोकने की शर्त

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू करने के लिए लेबनान में इजरायली हमलों का तत्काल रुकना एक प्रमुख शर्त है। उन्होंने कहा कि ईरान की 10-सूत्रीय योजना के तहत प्रस्तावित युद्धविराम "ईरानी नेतृत्व और जनता के बलिदान का परिणाम" है और अब देश कूटनीति, रक्षा तथा जनभागीदारी के स्तर पर एकजुट रहेगा।  

पेज़ेश्कियान ने कहा, "ईरान द्वारा अपेक्षित सामान्य सिद्धांतों की स्वीकृति के साथ, यह युद्धविराम हमारे महान शहीद नेता खामेनेई के रक्त का फल था, और यह मैदान में समस्त जनता की उपस्थिति की उपलब्धि थी। आज से हम एकजुट रहेंगे, चाहे वह कूटनीति हो, रक्षा हो, जन-लामबंदी हो, या सेवा-प्रदान हो।" दूसरी ओर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने वार्ता से पहले ही समझौते के उल्लंघन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लेबनान में हमले जारी रहने, ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ और परमाणु संवर्धन के अधिकार से इनकार जैसे कदमों के बीच युद्धविराम और बातचीत "अतार्किक" है। श्री ग़ालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की 10-सूत्री योजना को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार किया है। 

लेबनान में युद्धविराम लागू न करना, ईरान के हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ होना और ईरान के परमाणु संवर्धन के अधिकार को नकारना इसके तीन बिंदुओं का उल्लंघन है। श्री ग़ालिबफ़ ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा, "अमेरिका के प्रति हमारे मन में जो गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है, उसकी जड़ें उसके द्वारा हर तरह की प्रतिबद्धताओं के बार-बार किये गये उल्लंघनों में हैं। यह एक ऐसा सिलसिला जो खेदजनक रूप से एक बार फिर दोहराया गया है।" उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में द्विपक्षीय युद्धविराम या वार्ता आगे बढ़ाना उचित नहीं है और इससे अमेरिका पर अविश्वास और गहरा होता है। 

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