बाराबंकी : राज्य सूचना आयुक्त ने लंबित जन सूचना मामलों पर जताई चिंता
बाराबंकी, अमृत विचार : प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने कलेक्ट्रेट के लोकसभागार में आयोजित जन सूचना अधिकारियों की समीक्षा बैठक और प्रेस वार्ता में कहा कि जनपद बाराबंकी में 129 जन सूचना मामले लंबित हैं, जो सबसे निराशाजनक स्थिति है। बैठक में 129 जन सूचना अधिकारी बुलाए गए थे, लेकिन न्याय विभाग, कृषि विभाग और उद्योग विभाग के अधिकारी अनुपस्थित रहे।
राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि अधिकांश जन सूचना अधिकारियों को सूचना अधिकार अधिनियम की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्हें प्रथम और द्वितीय अपील, अपीलीय अधिकारी और उसकी प्रक्रिया, सूचना देने की समय सीमा और शिकायत व अपील में अंतर जैसी बुनियादी जानकारी भी नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 50,000 से अधिक लंबित मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, लेकिन अभी भी 20,000 से अधिक मामले राज्य सूचना आयोग में लंबित हैं। 2006 से अब तक 181 अधिकारियों को अधिनियम के तहत दंडित किया गया है, जिसमें जुर्माने की राशि 25,000 है, लेकिन अब तक वसूली नहीं हुई। बाराबंकी में लंबित मामलों में सबसे ज्यादा 33 मामले पंचायती राज विभाग, 23 मामले ग्राम विकास विभाग, 17 मामले राजस्व विभाग, 14 मामले नगर पालिका व नगर पंचायत, 5-5 मामले बिजली विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग, तथा 3-3 मामले पुलिस, न्याय और कृषि विभाग में लंबित हैं। समीक्षा के दौरान लंबित मामलों के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
तहसील और ब्लॉक किया निरीक्षण
प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने ब्लॉक बनीकोडर और तहसील रामसनेहीघाट का भी औचक निरीक्षण किया। उनके अचानक पहुंचने से दफ्तरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और अधिकारी-कर्मचारी तत्काल सक्रिय हो उठे। बनीकोडर में खंड विकास अधिकारी विनय कुमार मिश्रा से सूचना संबंधित रजिस्टर और अभिलेख तलब किए गए, जिसमें कई खामियां पाई गईं। राज्य सूचना आयुक्त ने सख्त नाराजगी जताई और जवाब-तलब करने व नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। तहसील रामसनेहीघाट में उप जिलाधिकारी अनुराग सिंह और तहसीलदार शशांकनाथ उपाध्याय ने उनका स्वागत किया। निरीक्षण के दौरान लंबित मामलों और शिकायत निस्तारण में लापरवाही पर चिंता जताई और अपीलीय अधिकारियों को समयसीमा में प्रकरण निस्तारित करने के सख्त निर्देश दिए।
