खेती को बिजनेस के रूप में विकसित करें किसान, उत्पादन के बाद खुद करें मार्केटिंग
गन्ना के साथ हल्दी, मूंग, काली मिर्च और अजवाइन की करें खेती
लखनऊ में कृषि विज्ञान कांग्रेस में नई चुनौतियों पर मंथन, वैज्ञानिकों ने अहम सुझाव दिए।
लखनऊ, अमृत विचार : काश्तकार खेती को केवल अनाज के उत्पादन तक कार्य समझकर न करें। बल्कि इसे व्यवसाय के रूप में विकसित करें। अनाज उत्पादन के बाद अच्छा भाव प्राप्त करने के लिए मार्केटिंग, पैकेजिंग, वैल्यू एडिशन आदि पर ध्यान दें। इसके अलावा सह-फसली खेती पर जोर दें। एक के साथ कई फसलों को उगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
यूपी की राजधानी लखनऊ में आयोजित कृषि विज्ञान कांग्रेस में बोलते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को ये संदेश दिया है। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि गन्ना के साथ हल्दी, मूंग, काली मिर्च और अजवाइन जैसी फसलों को शामिल कर सकते हैं।
इसके साथ ही पोषण सुरक्षा पर जोर देते हुए बेबी फूड में गाजर, आम और अमरूद पाउडर के उपयोग तथा आंवला, जामुन जैसे उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने जलवायु अनुकूल खेती और नई तकनीकों के जरिए कृषि को अधिक उत्पादक, सुरक्षित और लाभकारी बनाने पर बल दिया।
किसानों से कहा कि वे मृदा स्वास्थ्य के बारे में जागरुक बनें। जैव-उर्वरक आधारित पोषक तत्व प्रबंधन और कार्बनिक कार्बन बढ़ाने पर बल दिया गया।
कृषि वैज्ञानिक, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में आयोजित छठवीं उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन गुरुवार को सात तकनीकी सत्रों में खेती की नई चुनौतियों पर व्यापक मंथन कर रहे थे। “विकसित कृषि विकसित भारत @2047” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी खेती पर जोर दिया।
तकनीकी सत्रों में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, जलवायु सहिष्णु फसल किस्मों के विकास, जैविक तनाव प्रबंधन और फार्म मशीनीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। “खेत एक फसल अनेक” की अवधारणा को अपनाने की भी संस्तुति की गई।
