World Homeopathy Day: आईवीएफ फेल हुआ तो होम्योपैथी ने दिया मां बनने का सुख, बनी उम्मीद की किरण, महंगे विकल्प से राहत
पंकज द्विवेदी/ लखनऊ, अमृत विचार : अनियमित जीवनशैली, बढ़ता मोटापा, देर से शादी और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं के कारण आज की युवतियां शादी के कई वर्षों बाद भी सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में जहां एक ओर महंगा आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) कई दंपतियों की पहुंच से बाहर है, वहीं होम्योपैथी पद्धति अब एक सस्ती और प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है।
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लखनऊ के जानकीपुरम स्थित केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान में हर शनिवार को विशेष इनफर्टिलिटी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ. लिपि पुष्पा की देखरेख में चल रही इस क्लीनिक में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या वर्मा के अनुसार, प्रत्येक ओपीडी में करीब 50 महिलाएं गर्भधारण और अन्य समस्याओं को लेकर पहुंच रही हैं। पिछले एक वर्ष में यहां इलाज से 11 महिलाओं को मातृत्व का सुख मिल चुका है, जिससे लोगों का होम्योपैथी पर विश्वास भी बढ़ा है।
केस-1: 8 साल बाद जगी उम्मीद, 5 महीने में मिली खुशखबरी
अलीगंज की एक युवती शादी के आठ साल बाद भी गर्भधारण नहीं कर सकी। आईवीएफ पर लाखों खर्च करने के बाद भी असफलता हाथ लगी, जिससे दंपति मानसिक रूप से टूट चुके थे। बाद में संस्थान में परामर्श लेने पर काउंसलिंग और होम्योपैथिक उपचार शुरू किया गया। महज पांच महीने में युवती गर्भवती हो गई। जांच में सामने आया कि उसके अंडाशय छोटे थे, जिसका सफल उपचार किया गया।
केस-2: हार्मोनल असंतुलन दूर, तीन महीने में गर्भधारण
एक अन्य मामले में बेटे की मृत्यु के बाद दंपति गहरे सदमे में चला गया। कई वर्षों तक गर्भधारण न होने पर उन्होंने संस्थान का रुख किया। जांच में हार्मोनल असंतुलन सामने आया। इलाज शुरू होने के मात्र तीन महीने के भीतर ही युवती ने गर्भधारण कर लिया।
केस-3: बार-बार गर्भपात से मिली राहत
लखनऊ की ही एक महिला को शादी के सात साल बाद भी बार-बार गर्भपात की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। आर्थिक तंगी के कारण वह आईवीएफ नहीं करा सकी। होम्योपैथिक इलाज शुरू करने के कुछ ही समय में वह गर्भवती हुई और जांच में गर्भस्थ शिशु स्वस्थ पाया गया।
महिलाओं के साथ पुरुषों का भी होता है इलाज
प्रभारी निदेशक डॉ. लिपि पुष्पा बताती हैं कि बांझपन के मामलों में महिला और पुरुष दोनों की जांच बेहद जरूरी होती है। कई मामलों में समस्या पुरुषों में पाई जाती है, जिसके इलाज से महिला आसानी से गर्भधारण कर सकती है।
